- बढ़ती आपराधिक घटनाओं को देख पुलिस सक्रिय
- पहले ही दिन 1645 का सत्यापन, लेकिन रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर
- 1013 हिस्ट्रीशीटर अपने घरों पर मिले मौजूद, 329 आजीविका के लिए गए बाहर
गोरखपुर। जिले में बढ़ती आपराधिक घटनाओं के बीच पुलिस की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। 157 हिस्ट्रीशीटर लापता हैं, तीन महीने से पुलिस को इनके बारे में कोई जानकारी नहीं है। अब उनकी तलाश के लिए मुखबिर तंत्र और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस का सहारा पुलिस ले रही है। पुलिस अब यह भी खंगाल रही है कि लापता हिस्ट्रीशीटरों ने कोई वारदात तो नहीं की है। चौंकाने वाली बात यह है कि, 24 हिस्ट्रीशीटरों की मौत हो चुकी है, इसके बावजूद उनके नाम पुलिस रिकॉर्ड में जिंदा हैं।
पुलिस ने हिस्ट्रीशीटरों की निगरानी के लिए तीन दिवसीय सघन सत्यापन अभियान शुरू किया है। आंकड़ों के मुताबिक, जिले में 1789 हिस्ट्रीशीटर चिह्नित हैं। पहले ही दिन 1645 का सत्यापन पूरा कर लिया गया, लेकिन इस प्रक्रिया ने पुलिस के दावों की पोल खोल दी। सत्यापन के दौरान 1013 हिस्ट्रीशीटर अपने घरों पर मिले, जबकि 122 जेल में बंद हैं। वहीं, 329 के बारे में परिजनों ने बताया कि वे रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में हैं।
154 हिस्ट्रीशीटरों का सत्यापन अब तक नहीं हो सका है। पुलिस का कहना है कि शेष का सत्यापन अगले चरण में किया जाएगा, लेकिन जिस तरह से लगातार वारदातों में हिस्ट्रीशीटरों के नाम सामने आ रहे हैं। नियमों के अनुसार बीट पुलिस को अपने क्षेत्र के हिस्ट्रीशीटरों की हर गतिविधि की जानकारी रखनी होती है। इसके बावजूद जब कोई बड़ी घटना होती है, तभी पुलिस सक्रिय नजर आती है।
अभियान का उद्देश्य अपराधियों की वर्तमान स्थिति का पता लगाना और उनकी गतिविधियों पर नजर रखकर अपराध नियंत्रण करना है। शहर में मौजूद हिस्ट्रीशीटरों का सत्यापन शुरू कर दिया गया है। जो हिस्ट्रीशीटर लापता हैं, उनकी भी तलाश की जा रही है। - डॉ. कौस्तुभ, एसएसपी