देवरिया जिले में क्षय के इलाज में थोड़ी सी लापरवाही भारी पड़ सकती है। नियमित दवा न लेने से मरीज एमडीआर टीबी (मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट ट्यूबरकुलोसिस) की श्रेणी में आ जाता है। जनपद में एक वर्ष में 120 एमडीआर टीबी के मरीज चिह्नित किए गए हैं। ऐसे मरीजों से बीमारी फैलने का खतरा है। इसके प्रति स्वास्थ्य विभाग गंभीर है और चिह्नित मरीजों का इलाज किया जा रहा है। साथ ही उन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
क्षय रोग के उन्मूलन के लिए सरकार ने 2025 लक्ष्य निर्धारित किया है। स्वास्थ्य विभाग अभियान चलाकर मरीजों को चिह्नित कर रहा है। इसके तहत जनवरी 2020 से 23 फरवरी 2021 तक 4417 मरीज चिह्नित किए गए। इसमें 120 मरीज एमडीआर श्रेणी में चले गए हैं।
इनका इलाज चल रहा है, लेकिन इन मरीजों से बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है। हालांकि सामान्य टीबी का इलाज कराना आसान है। क्षय रोग होने के बाद मरीज छह माह तक बराबर दवा ले तो उसे बीमारी से छुटकारा भी मिल सकता है, लेकिन एमडीआर टीबी की श्रेणी में आने के बाद मर्ज को ठीक करना आसान नहीं होता है।