पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्यालय गोरखपुर स्थित यांत्रिक कारखाना इस रेलवे की रीढ़ मानी जाती है। लेकिन इस कारखाना को बनाने के पीछे एक खास वजह थी। वह, यह कि पहले यह कारखाना सोनपुर में था। जहां प्रति वर्ष बाढ़ से कई महीने तक कारखाने का काम बंद हो जाया करता था।
इस कारण 1898 में एक सर्वे टीम सोनपुर से पैदल, नाव तथा घोड़ों आदि की मदद से सात-आठ दिन में गोरखपुर पहुंची। वर्ष 1898 के सर्वे के बाद सोनपुर से कारखाने को गोरखपुर स्थानांतरित करने का कार्य प्रारंभ हुआ, जो लगभग पांच वर्षो के उपरांत वर्ष 1903 में पूरा हुआ।
29.8 हेक्टेयर में फैला है कारखाना
गोरखपुर यांत्रिक कारखाना कुल 29.8 हेक्टेयर भूमि में फैला हुआ है इसमें से 12.6 हेक्टेयर क्षेत्रफल में विभिन्न शॉप तथा कार्यालय स्थित है। इस कारखाने की औपचारिक स्थापना वर्ष 1903 में हुई थी।
बंगाल एवं असम नार्थ वेस्ट रेलवे लोकोमोटिव एवं कैरेज कारखाना का नाम दिया गया तथा इसके सर्वोच्च अधिकारी के रूप में एइ रॉयल्स सुपरिटेंडेंट के पद पर स्थापित हुए।