नौतनवा जा रही 15105 इंटरसिटी एक्सप्रेस से बुधवार को पूर्वाह्न लगभग 11:30 बजे लोहरपुरवा रेलवे हाल्ट स्टेशन के पास 100 भेड़ों की कटने से मौत हो गई। दुर्घटना के बाद ट्रेन 15 मिनट तक खड़ी रही। कंट्रोल रूम को सूचना देने के बाद लोको पायलटों और गार्ड (ट्रेन मैनेजर) ने ट्रेन को आगे के लिए रवाना किया। मौके पर पहुंचे रेलवे के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भेड़ों को दफना दिया।
बताया जा रहा है कि सुबह से ही बड़ी संख्या में भेड़ों को रेल लाइन के पास घास चरने के लिए छोड़ दिया गया था। इसी दौरान नौतनवा की ओर से आ रही ट्रेन से यह हादसा हो गया। भेड़ों के कटने के बाद यात्रियों में भी अफरातफरी मच गई। कुछ यात्री ट्रेन से उतर गए। लोको पायलटों ने पटरी से भेड़ों को किनारे किया।
जानकारों के अनुसार, कोहरा में दृश्यता कम होने के चलते कैटल रन ओवर (सीआरओ) की घटनाएं बढ़ गई हैं। खेत खाली नहीं होने के चलते अधिकतर पशु रेल लाइनों के किनारे ही घास चर रहे हैं। उनके स्वामी भी पशुओं की सुधि नहीं ले रहे।
पिछले सप्ताह 24 दिसंबर की रात को भी नौतनवा से गोरखपुर आ रही 55072 नंबर की पैसेंजर ट्रेन की चपेट में आने से एक नीलगाय सहित 10 गोवंशीय पुश मर गए थे। तीन पशु घायल हो गए थे। हादसा आनंदनगर-नौतनवा रेल रूट पर लोक विद्यापीठ नगर हाल्ट के निकट बरगदवां रामसहाय गांव में हुआ था।
पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह के अनुसार, कैटल रनओवर की घटनाओं पर रोकथाम लगाने के लिए ट्रैक के किनारे रेल फेंसिंग लगाए जाने का कार्य किया जा रहा है। लखनऊ से छपरा मुख्य रेल मार्ग पर स्टील सेफ्टी फेंसिंग लगाए जाने का कार्य प्रगति पर है। इसके लग जाने के बाद कैटल रनओवर की घटनाओं में कमी आएगी।