सोचिए आप एक नौकरी का इंटरव्यू देने जा रहे हैं। अच्छे से तैयार हुए, घर से निकले और रास्ते में अपने पसंदीदा कॉफी शॉप पर रुक गए। एक आइस्ड कॉफी ली और सीधे इंटरव्यू देने पहुंच गए। बातचीत शुरू हुई और इस दौरान कॉफी आपके हाथ में ही रही।
इस बहस की शुरुआत अमेरिका की एक जॉब एजेंसी की प्रमुख कैटलिन वेनियेन की TikTok वीडियो से हुई। उनका TikTok हैंडल caitlinrecruiter है। फरवरी 2026 में डाले गए इस वीडियो में उन्होंने बताया कि कुछ जेन जी उम्मीदवार इंटरव्यू में हाथ में आइस्ड कॉफी लेकर पहुंच रहे हैं।
उनका कहना था कि खासकर औपचारिक इंटरव्यू में ऐसा करना उम्मीदवार को जरूरत से ज्यादा कैजुअल दिखा सकता है। सामने वाले को ऐसा लग सकता है कि इंटरव्यू उसके लिए कोई खास मौका नहीं, बल्कि दिन के बाकी कामों के बीच निपटाया जाने वाला एक और काम है।
असल में यह बहस सिर्फ एक कप कॉफी की नहीं है। इसके पीछे जेन जी और पुरानी पीढ़ी के बीच काम को लेकर बदलती सोच है। पहले नौकरी को लेकर यह सोच ज्यादा आम थी कि समय पर पहुंचो, ज्यादा काम करो, जरूरत पड़े तो अतिरिक्त समय दो और बॉस की बात को प्राथमिकता दो। जेन जी के बीच काम को लेकर सोच थोड़ी अलग दिखाई देती है। नौकरी जरूरी है, लेकिन उसके साथ निजी समय, मानसिक शांति और अपनी सीमाएं भी जरूरी हैं। यही वजह है कि अब युवा कर्मचारी कई बार सीधे अपनी बात रखते हैं।
मान लीजिए इंटरव्यू सुबह 11 बजे है और 10:55 पर उम्मीदवार का मैसेज आता है 'क्या हम इंटरव्यू का समय बदल सकते हैं?' पुरानी पीढ़ी को यह लापरवाही लग सकती है। लेकिन जेन जी के लिए अपनी परेशानी सीधे बताना उतना असामान्य नहीं है। पहले उम्मीदवार शायद अपनी परेशानी छिपाकर तय समय पर पहुंचने की कोशिश करता। अब युवा उम्मीदवार अपनी स्थिति साफ बताकर दूसरा समय मांग सकता है। यानी एक ही चीज को दो पीढ़ियां दो अलग नजरिए से देख सकती हैं।
इंटरव्यू में पहनावे को लेकर भी काफी बदलाव आया है। पहले फॉर्मल शर्ट, पैंट, पॉलिश किए हुए जूते और कई जगह टाई को इंटरव्यू के लिए जरूरी माना जाता था। अब तस्वीर बदल रही है। स्नीकर्स, ढीली टी-शर्ट, अलग हेयरस्टाइल, रंगे हुए बाल और पियर्सिंग जैसे अंदाज भी युवाओं के बीच आम हैं। जेन जी के लिए कपड़े सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि उनकी अपनी पहचान और आराम का हिस्सा भी हैं। लेकिन सवाल यह है कि आराम और लापरवाही के बीच फर्क कैसे तय होगा?
असली टकराव कॉफी का नहीं, सोच का है, आइस्ड कॉफी तो सिर्फ शुरुआत है। असली सवाल यह है कि आज के समय में पेशेवर होने का मतलब क्या है? एक पीढ़ी के लिए इसका मतलब हो सकता है- औपचारिक कपड़े, समय की पाबंदी और तय नियमों का पालन। दूसरी तरफ जेन जी के लिए अपनी बात साफ रखना, अपनी सीमाएं तय करना और काम के साथ निजी जिंदगी के लिए जगह बनाना भी उतना ही जरूरी हो सकता है। इसी वजह से जो चीज एक व्यक्ति को आत्मविश्वास दिखाती है, वही दूसरे को जरूरत से ज्यादा कैजुअल लग सकती है। तो अगली बार कोई जेन जी उम्मीदवार इंटरव्यू में आइस्ड कॉफी लेकर पहुंचे, तो मामला सिर्फ कॉफी का नहीं होगा। यह उस बदलती सोच की झलक होगी, जिसमें नई पीढ़ी नौकरी के पुराने तौर-तरीकों को अपने हिसाब से देख रही है।