योग का मूल रूप आध्यात्मिक विकास का अभ्यास है, जिसमें शरीर और मन को प्रशिक्षित करते हुए स्वयं के बारे में अवगत करना होता है। लेकिन वक्त के साथ योग के मूल रूप में बड़ा परिवर्तन देखने को मिला। समय के साथ योग शारीरिक व्यायाम का एक तरीका बन गया और बाद में बड़ा उद्योग।
प्राचीन हिंदू ग्रंथ ऋग्वेद के मुताबिक, योग की प्राचीन जड़ें 3000 साल से पुरानी हैं। उस दौर में योग का उद्देश्य व्यक्ति के विवेक, जागरूकता और आत्म नियमन को बढ़ाना था। हालांकि योग का प्रसार हुआ तो यह शारीरिक और आध्यात्मिक विकास की चाह रखने वालों के बीच विभाजन को बढ़ाता चला गया।
योग में आए नवाचार का असर केवल शारीरिक और आध्यात्मिक अभ्यास तक सीमित नहीं रहा, बल्कि योग परिधान पर भी इसका असर देखने को मिला। भले ही योग भारत की संस्कृति से निकला है, लेकिन विदेशी संपर्क में आते ही योग के स्वरूप में परिवर्तन आए। ये परिवर्तन शरीर के लिए नुकसानदायक हैं लेकिन उद्योग और फैशन के लिहाज से सफल रहे।
फैशन जगत ने भारतीय पारंपरिक योग में जो क्रांतिकारी बदलाव लाए, उसका गहरा असर कोविड काल में देखने को मिला। योग और फैशन पर हुए बदलाव, और नवाचार को विस्तार से समझें।
योग का बदलता स्वरूप
हिंदू ग्रंथों के मुताबिक, योग की उत्पत्ति और विस्तार गुरु शिष्य परंपरा के तहत हुआ। जिसमें योग का ज्ञान परंपरागत तौर पर एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को मिलता रहा। ऋषि- मुनि वैदिक काल में वेदों की शिक्षा के साथ ही शस्त्र और योग की शिक्षा भी देते थे। वेदों और सिंधु घाटी सभ्यता से प्राप्त मूर्तियों में योग मुद्राओं और आसनों को लेकर जो भी सबूत मिले, उनके मुताबिक योग प्राकृतिकता के बीच, गुफा, पर्वत या किसी ऐसी जगह पर किया जाता था, जो आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का काम करता है। लेकिन आज के दौर में योग उद्योग से जुड़ गया। अब दुनियाभर में बड़े और लग्जरी योग स्टूडियो हैं, जहां लोग ध्यान, मेडिटेशन और योग की क्लास लेते हैं।
योग स्टूडियो में योग का स्वरूप
पश्चिमी देशों में योग का प्रसार करने वाले योग गुरु बी. के. एस. अयंगर, आधुनिक योग के पिता योग गुरु तिरुमलाई कृष्णमचार्य और अन्य कई योग गुरुओं ने अमेरिका, यूके में योग के महत्व का प्रसार किया। उन्होंने विदेशी लोगों का योग क्लासेज दीं। जब पाश्चात्य कल्चर में योग शामिल हुआ तो इसका स्वरूप अध्यात्म से निकलकर शारीरिक व्यायाम के रूप में आ गया। व्यायाम करने के लिए आपको एक शांत और सुविधाजनक जगह की जरूरत होती है।
विदेशी योग छात्रों ने भारत की तरह योग को खुले मैदान या कुडप्पा नाम के चट्टान के बने पत्थरों पर नंगे पैर करने की परंपरा को खत्म किया। वह अपने घर पर फिसलन वाली जमीन पर योग करते थे। इसलिए उन्हें योग मैट की जरूरत महसूस हुई। धीरे धीरे योग स्टूडियो विकसित हुए।
दुनिया के सबसे टॉप क्लास योग स्टूडियो का जिक्र किया जाए तो भारत से बाहर विदेशों में आपको बेस्ट योग स्टूडियो मिल जाएंगे। इसमें यूरोपीय देशों समेत, यूएसए, दक्षिण अमेरिका और एशियाई देश शामिल हैं। एमस्टरडम का डिलाइट योगा स्टूडियो, ऑस्ट्रेलिया का गुड वाइब योगा स्टूडियो, लंडन में स्थित मूव स्टूडियो और हांगकांग का फाइव एलिमेंट्स हैबिटेट स्टूडियो योग की सदियों पुरानी प्रथा को चुनौती देते हैं।
ये स्टूडियो शांत और सुंदर स्थानों पर स्थित हैं, जो आपको प्राचीन काल में साधु संतों के द्वारा प्राकृतिक वातावरण में योग करने जैसी अनुभूति तो देते हैं लेकिन इसके लिए आपको काफी पैसा व्यय करना पड़ता है। कुल मिलाकर भौगोलिक स्तर पर आज के योग को प्राचीनता से जुड़ने का भरपूर प्रयास जारी है। लेकिन अन्य मामलों में भी योग को लेकर क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिले। ये बदलाव योग फैशन बन गया है।