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विचार: पूर्वांचल का कायाकल्प और भदोही कालीन उद्योग का पुनर्जागरण

Mon, 05 Oct 2026 01:36 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र पीयूष कुमार बरनवाल
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भदोही में यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ। - फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक-आर्थिक इतिहास में साल 2017 एक निर्णायक मोड़ के रूप में दर्ज है। वर्ष 2017 से पहले पूर्वांचल की पहचान एक ऐसे उपेक्षित और पिछड़े क्षेत्र के रूप में होती थी, जहां समस्याओं का अंबार था और सरकारी इच्छाशक्ति का सर्वथा अभाव। पूर्वांचल का नाम आते ही मन में बदहाल सड़कें, अंधेरे में डूबे गांव-शहर, बेलगाम अपराध और थमी हुई आर्थिक गतिविधियां ही कौंधती थीं। बुनियादी सुविधाओं के अभाव और प्रशासनिक उदासीनता की सबसे बड़ी कीमत उठानी पड़ी यहां के पारंपरिक उद्योगों को, विशेषकर भदोही के विश्व प्रसिद्ध कालीन उद्योग को। जो भदोही कभी अपनी बुनाई कला और रेशमी-ऊनी कालीनों के लिए वैश्विक पटल पर भारत की धाक जमाता था, वह 2017 से पहले दम तोड़ने की कगार पर पहुंच चुका था। लेकिन 2017 के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार की दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति, त्वरित निर्णय क्षमता और विकासपरक दृष्टि ने पूर्वांचल और भदोही के परिदृश्य को 360 डिग्री बदल दिया।
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पूर्वांचल को देश के प्रमुख बाजारों और बंदरगाहों से जोड़ने के लिए कोई आधुनिक एक्सप्रेसवे या सुदृढ़ हाईवे नेटवर्क नहीं था। सड़कें गड्ढों में तब्दील थीं, जिससे माल ढुलाई का खर्च और समय दोनों अत्यधिक बढ़ जाते थे। निर्यात पर आधारित कालीन उद्योग के लिए यह एक बहुत बड़ा झटका था, क्योंकि समय पर डिलीवरी न मिलने के कारण विदेशी खरीदार कटने लगे थे। रही-सही कसर बिजली संकट ने पूरी कर दी। कारखानों को चलाने के लिए महंगे डीजल जनरेटरों का सहारा लेना पड़ता था, जिससे उत्पादन लागत इतनी बढ़ जाती थी कि भदोही का कालीन उद्योग अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा से बाहर होने लगा था।

भदोही को 'कारपेट सिटी' कहा जाता है, जहां की गलियों में सदियों पुराना ताना-बाना और बुनकरों की अद्वितीय कारीगरी सांस लेती है। मार्केटिंग और बुनियादी ढांचे के अभाव के कारण बुनकरों और निर्यातकों के पास अपने उत्पादों को विदेशी खरीदारों के सामने प्रदर्शित करने के लिए कोई आधुनिक मंच नहीं था।  

सत्ता संभालने के बाद योगी सरकार ने 'सबका साथ, सबका विकास' के मंत्र के साथ पूर्वांचल के पुनरुद्धार का संकल्प लिया। सरकार ने स्पष्ट किया कि पूर्वांचल केवल चुनावी मुद्दा नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के आर्थिक इंजन का मुख्य हिस्सा बनेगा। सबसे पहले योगी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत पूर्वांचल को माफियामुक्त किया गया। 

कानून-व्यवस्था में सुधार से व्यापारियों में विश्वास लौटा और जो पूर्वांचल कभी अपराध के लिए जाना जाता था, वह अब सुरक्षित निवेश का नया केंद्र बन गया। इसके बाद पूर्वांचल एक्सप्रेसवे जैसी ऐतिहासिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं ने पूरे क्षेत्र का भूगोल और अर्थशास्त्र बदलकर रख दिया। वाराणसी में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के विस्तार और जलमार्गों के विकास ने भदोही के निर्यातकों के लिए सीधे बंदरगाहों तक पहुंच आसान बना दी। गांव-देहात से लेकर औद्योगिक क्लस्टरों तक निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होने से उत्पादन लागत घटी और बंद पड़ी खड्डियां दोबारा चलने लगीं।

योगी सरकार द्वारा शुरू की गई 'एक जिला, एक उत्पाद' (ओडीओपी) योजना भदोही के कालीन उद्योग के लिए संजीवनी साबित हुई। सरकार ने भदोही के कालीन को न केवल एक मजबूत ब्रांड के रूप में प्रमोट किया, बल्कि वित्तीय सहायता, आधुनिक टूलकिट और ग्लोबल मार्केटिंग प्लेटफॉर्म भी उपलब्ध कराए। बदलाव का यह दावा केवल बातों तक सीमित नहीं है, बल्कि आधिकारिक आंकड़े इसकी स्पष्ट गवाही देते हैं। वित्त वर्ष 2016-17 में उत्तर प्रदेश का कुल मर्चेंडाइज निर्यात मात्र 84,076 करोड़ रुपये था, जो पूर्ववर्ती 2012-17 के कार्यकाल में मात्र 4.1 प्रतिशत की औसत वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहा था। लेकिन योगी सरकार की विकासपरक नीतियों के बल पर वित्त वर्ष 2024-25 में यह निर्यात बढ़कर 1,83,920 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। आज यह आंकड़ा दो लाख करोड़ के पार हो चुका है।

कालीन निर्यात के मोर्चे पर भदोही ने पुनः अपना ऐतिहासिक दबदबा कायम किया है। वित्त वर्ष 2024-25 में उत्तर प्रदेश का कुल कालीन निर्यात 5,667 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जिसमें अकेले भदोही की हिस्सेदारी 4,022 करोड़ रुपये रही। यह आंकड़ा राज्य के कुल कालीन निर्यात का 71.0 प्रतिशत है। यदि भदोही, मिर्जापुर और वाराणसी के पूरे कारपेट क्लस्टर को देखा जाए, तो यह निर्यात 4,960 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है, जो उत्तर प्रदेश के कुल कालीन निर्यात का 87.5 प्रतिशत है। इस पुनरुत्थान का सबसे मानवीय और सुखद पहलू यह है कि भदोही का कालीन क्षेत्र आज लगभग पांच लाख श्रमिकों, कारीगरों और बुनकरों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार प्रदान कर सुरक्षा और सम्मान दे रहा है, जिससे पलायन पर पूर्ण विराम लग चुका है।
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इसके अलावा, बुनियादी ढांचे को वैश्विक मानकों पर खड़ा करने के लिए योगी सरकार ने भदोही में 7.5 एकड़ में फैले विशाल 'कारपेट एक्सपो मार्ट' का निर्माण कार्य तेजी से पूरा कराकर 31 दिसंबर 2020 को इसका उद्घाटन किया। इससे अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को अब सीधे भदोही आकर सौदे करने की सुविधा मिली है।  

(अस्वीकरण: ये लेखक के निजी विचार हैं। लेख में दी गई जानकारी और तथ्यों के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। लेखक पीयूष कुमार बरनवाल, कालीन निर्यात संवर्धन परिषद के सदस्य हैं।)
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