साउथ इंडियन सिनेमा में इन दिनों जिस अभिनेत्री का नाम तेजी से चर्चा में है, वो हैं रुक्मिणी वसंत। ‘कातांरा चैप्टर 1’ में उनके प्रभावशाली किरदार ने दर्शकों को खासा प्रभावित किया, वहीं आज वह 29 साल की हो गई हैं। कम समय में रुक्मिणी ने अपनी सादगी, अभिनय की गहराई और मजबूत स्क्रीन प्रेजेंस से इंडस्ट्री में अलग पहचान बना ली है।
सैन्य परिवार से कला की दुनिया तक का सफर
रुक्मिणी वसंत का जन्म एक अनुशासित परिवार में हुआ। उनके पिता कर्नल वसंत वेंगोपल भारतीय सेना के जांबाज अधिकारी थे और कर्नाटक से अशोक चक्र पाने वाले पहले सैनिक थे। साल 2007 में जम्मू-कश्मीर के उरी में ड्यूटी के दौरान उनका निधन हो गया। पिता की वीरता और अनुशासन ने रुक्मिणी के व्यक्तित्व को गहराई से प्रभावित किया। वहीं उनकी मां सुभाषिनी वसंत एक जानी-मानी भरतनाट्यम नृत्यांगना रही हैं और बाद में सैनिक विधवाओं के लिए काम करने वाली संस्था से जुड़ीं। कला और संवेदनशीलता का यही संगम रुक्मिणी के अभिनय में भी साफ नजर आता है।
थिएटर में भी कर चुकीं काम
रुक्मिणी सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रहीं। उन्होंने अभिनय की बारीकियां सीखने के लिए लंदन स्थित रॉयल एकेडमी ऑफ ड्रामेटिक आर्ट (RADA) से प्रशिक्षण लिया। थिएटर बैकग्राउंड होने की वजह से उनके अभिनय में ठहराव, भावनात्मक गहराई और संयम नजर आता है, जो उन्हें भीड़ से अलग बनाता है।
इन फिल्मों से बदली किस्मत
भले ही उन्होंने साल 2019 में अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की, लेकिन असली पहचान उन्हें ‘सप्ता सागरदाचे एलो’ से मिली। इस फिल्म में उनके किरदार की भावनात्मक परतों ने दर्शकों को भीतर तक छू लिया। इसके बाद ‘दिल मद्रासी’, ‘बघीरा’ और अब ‘कातांरा चैप्टर 1’ जैसी फिल्मों ने उन्हें साउथ सिनेमा की भरोसेमंद अदाकारा बना दिया। एक ही साल में तीन बड़ी हिट देकर रुक्मिणी ने साबित कर दिया कि वह लंबी रेस की खिलाड़ी हैं।
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