दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग से एक दुखद खबर सामने आई है। 1990 के दशक में परिवारिक मनोरंजन फिल्मों के जरिए लाखों दर्शकों का दिल जीतने वाले दिग्गज निर्देशक वी. शेखर का 72 वर्ष की उम्र में शुक्रवार को चेन्नई में निधन हो गया। पिछले कुछ महीनों से उनकी तबीयत ठीक नहीं चल रही थी और 29 अक्टूबर को उन्हें चेन्नई के श्री रामचंद्र मेडिकल सेंटर में भर्ती कराया गया था। अस्पताल सूत्रों ने पुष्टि की कि शुक्रवार शाम करीब 6 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
वी. शेखर का निधन
वी. शेखर का नाम तमिल सिनेमा में उस दौर से जुड़ा है जब पारिवारिक रिश्तों, हास्य और सामाजिक मुद्दों को सहज और मनोरंजक तरीके से परदे पर दिखाने का चलन बढ़ रहा था। उनकी फिल्मों ने सिर्फ कमाई ही नहीं की, बल्कि दर्शकों के परिवारों में चर्चा का हिस्सा बनीं।
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कई फिल्मों में किया बेहतरीन काम
‘वरवु एत्ताना सेलवु पात्ताना’, ‘कलम मारी पोचु’, ‘वीरालुक्कु एथा वीकम’ और ‘ओन्ना इरुक्का काथुक्कनम’ जैसी कई फिल्में आज भी तमिल दर्शकों के बीच खास जगह रखती हैं। उनके निर्देशन में बनी कहानियां आम मध्यमवर्गीय परिवारों की दिनचर्या, संघर्ष और रिश्तों की गर्माहट को बेहद सरल और हास्यपूर्ण अंदाज में प्रस्तुत करती थीं।
इंडस्ट्री में शोक की लहर
वी. शेखर के निधन की खबर फैलते ही फिल्म उद्योग, राजनीतिक जगत और दर्शकों के बीच शोक की लहर दौड़ गई। पाट्टाली मक्कल कच्ची (PMK) के नेता डॉ. अंबुमणि रामदोस ने सोशल मीडिया पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि तमिल फिल्म इतिहास को वी. शेखर के योगदान के बिना पूरा नहीं लिखा जा सकता। उन्होंने इस दिग्गज निर्देशक के जाने को उद्योग की बड़ी क्षति बताया।
इसी तरह, वरिष्ठ फिल्म पत्रकार श्रीधर पिल्लै ने उन्हें 90 के दशक का प्रमुख पारिवारिक मनोरंजन का स्तंभ बताते हुए याद किया। पिल्लै ने कहा कि शेखर की फिल्मों में मध्यमवर्ग की भावनाओं को जिस सहजता से पिरोया जाता था, वह उनकी खास पहचान थी।