मद्रास संगीत अकादमी द्वारा दिए जाने वाले पुरस्कार को पा कर जहां टीएम कृष्णा काफी खुश नजर आ रहे हैं, वहीं कर्नाटक के कई संगीतकारों ने मद्रास संगीत अकादमी के इस फैसले के खिलाफ अपना विरोध दिखाया है।
प्रसिद्ध कर्नाटक संगीतकार टीएम कृष्णा को साल 2024 के 'संगीत कलानिधि पुरस्कार' से सम्मानित किया गया है। इस पुरस्कार को कर्नाटक संगीत का ऑस्कर कहा जाता है। किसी भी कलाकार के लिए 'संगीत कलानिधि पुरस्कार' का मिलना अपने आप में बहुत बड़ी बात है। मद्रास संगीत अकादमी द्वारा दिए जाने वाले पुरस्कार को पा कर जहां टीएम कृष्णा काफी खुश नजर आ रहे हैं, वहीं कर्नाटक के कई संगीतकारों ने मद्रास संगीत अकादमी के इस फैसले के खिलाफ अपना विरोध दिखाया है। आइए आपको बताते हैं क्या है पूरा मसला--
कुछ संगीतकारों को नहीं पसंद आया अंदाज
टीएम कृष्णा न सिर्फ एक संगीतकार के रूप में प्रसिद्ध हैं बल्कि वे अपने वामपंथी विचारधारा के लिए भी जाने जाते हैं। वे समाज में फैली जातिगत विषमताओं के बारे में भी आवाज बुलंद करते आए हैं। टीएम कृष्णा के लिए कहा जाता है कि वे पेरियार का महिमामंडन करते हैं। कर्नाटक के कुछ संगीतकारों को उनका यह अंदाज बिल्कुल भी पसंद नहीं है।
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'त्रिचूर ब्रदर्स' ने जताया विरोध
श्री कृष्ण मोहन और राम कुमार मोहन की जोड़ी कर्नाटक संगीत इंडस्ट्री में काफी मशहूर है। उनके फैंस उन्हें 'त्रिचूर ब्रदर्स' के नाम से भी जानते हैं। 'त्रिचूर ब्रदर्स' ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से टीएम कृष्णा को 'संगीत कलानिधि पुरस्कार' दिए जाने पर विरोध जताते हुए लिखा है, 'हम दिसंबर में होने जा रहे समारोह में शामिल नहीं होंगे और वजह आप सबको पता है।'
एमएस सुब्बूलक्ष्मी का अपमान
प्रसिद्ध संगीतकार रजनी और गायत्री ने भी टीएम कृष्णा को 'संगीत कलानिधि पुरस्कार' दिए जाने का विरोध किया है। उन्होंने भी अपने सोशल मीडिया हैंडल से विरोध प्रदर्शन करते हुए लिखा है, 'टीएम कृष्णा को 'संगीत कलानिधि पुरस्कार' देना महान संगीतकार एमएस सुब्बूलक्ष्मी का अपमान है।' साथ ही साथ उन्होंने यह भी कहा कि वे टीएम कृष्णा की अध्यक्षता में होने वाले 98वें वार्षिक सम्मेलन का हिस्सा नहीं बनेंगी।