लाठी चार्ज की जगह नहीं
एक्टर ने इस बात पर भी जोर दिया कि जवाबदेही चुनिंदा नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि समाज में पैलेट गन और लाठी-चार्ज की कोई जगह नहीं है, मगर सुरक्षा कर्मियों पर हमले और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं की भी उतनी ही निष्पक्षता से जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'टकराव की जगह बातचीत को आते देखकर खुशी हुई। असहमति पर बातचीत होनी चाहिए। यही लोकतंत्र है।'
कमल ने की ये मांग
उन्होंने जोर देकर कहा, 'यह पल और मौका पेपर लीक से कहीं बड़ा है। मैं शिक्षा और परीक्षा सुधार पर एक राष्ट्रीय आयोग बनाने का आग्रह करता हूं। जिसके पास परीक्षाओं में भरोसा बहाल करने, पढ़ाई का तनाव कम करने और शिक्षा को आधुनिक बनाने का तीन महीने का रोडमैप हो। ऐसा आयोग जो तमिलनाडु की आवाज भी सुने, जहां युवा अनीता की मौत ने सबसे पहले एक अहम परीक्षा की मानवीय कीमत दिखाई थी।'