1962 में बनाई पहली डाॅक्यूमेंट्री
1959 में श्याम बेनेगल मुंबई आ गए। यहां उन्होंने एक विज्ञापन कंपनी में कॉपीराइटर के तौर पर काम करना शुरू कर दिया। प्रमोट होकर वो यहां क्रिएटिव हेड बने। 1962 में उन्होंने गुजराती भाषा में अपनी पहली डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाई। 1966 से लेकर 1973 तक श्याम बेनेगल पुणे स्थित फिल्म और टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में पढ़ाते रहे। 1974 में अपनी पहली फीचर फिल्म 'अंकुर' बनाने से पहले श्याग बेनेगल ने एड एजेंसियों के लिए कई एड फिल्में बनाईं।
स्मिता पाटिल और शबाना आज्मी के साथ श्याम बेनेगल
- फोटो : एक्स
पहली फिल्म ने ही जीता नेशनल अवॉर्ड, बर्लिन में भी छाई
अपनी पहली फिल्म ‘अंकुर’ में श्याम बेनेगल ने आंध्र प्रदेश के किसानों के मुद्दों को उठाया था। इस फिल्म को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समेत 43 पुरस्कारों से नवाजा गया। 24 बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में यह फिल्म गोल्डन बीयर कैटेगरी में नामंकित हुई थी। इसके बाद उन्होंने अपने करियर में ‘निशांत’ और ‘मथंन’ समेत कई हिट फिल्में बनाईं।
पहली क्राउड फंडिंग फिल्म ‘मंथन’, 5 लाख किसानों ने पैसा लगाया
श्याम बेनेगल की फिल्म ‘मंथंन’ देश की पहली क्राउड फंडिंग फिल्म थी। 1976 में रिलीज हुई इस फिल्म को बनाने के लिए पांच लाख किसानों ने उस दौर में 2 करोड़ रुपए एकत्रित करके दान किए थे। इस तरह यह पांच लाख प्रोड्यूसर वाली इकलौती फिल्म कहलाई। इसमें स्मिता पाटिल, गिरीश कर्नाड, नसीरुद्दीन शाह और अमरीश पुरी जैसे बड़े कलाकारों ने काम किया था।
13 राष्ट्रीय पुरस्कार, पद्मश्री और पद्म भूषण से सम्मानित
- श्याम बेनेगल के नाम सबसे ज्यादा राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने का रिकॉर्ड है। उन्होंने अलग-अलग कैटेगरी में 13 राष्ट्रीय पुरस्कार अपने नाम किए।
- अपने करियर में 24 फिल्में, 45 डॉक्यूमेंट्री और 15 एड फिल्में बनाने वाले श्याम बेनेगल को फिल्म जगत को दिए योगदान के लिए 1976 में पद्मश्री और 1991 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।
- बेनेगल को 2005 में भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सम्मान दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड भी दिया गया।
दूरदर्शन के लिए कई टीवी शाेज भी बनाए
श्याम बेनेगल ने अपने करियर में ‘जुबैदा’, ‘द मेकिंग ऑफ द महात्मा’, ‘नेताजी सुभाष चंद्र बोसः द फॉरगॉटेन हीरो’, ‘मंडी’, ‘आरोहन’ और ‘वेल डन अब्बा’ जैसी दर्जनों बेहतरीन फिल्में बनाईं। फिल्मों के अलावा बेनेगल ने जवाहरलाल नेहरू और सत्यजीत रे पर डॉक्यूमेंट्री फिल्में भी बनाईं। उन्होंने दूरदर्शन के लिए धारावाहिक 'यात्रा', 'कथा सागर' और 'भारत एक खोज' का भी निर्देशन किया।