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Shyam Benegal: जानिए श्याम बेनेगल की आखिरी फिल्म से जुड़े किस्से, जिसने बांग्लादेश में करवा दिया तख्ता पलट

Mon, 23 Dec 2024 09:09 PM IST
साक्षी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Shyam Benegal Passed Away: श्याम बेनेगल का आज सोमवार को 23 साल की उम्र में निधन हो गया है। चलिए आपको बताते हैं श्याम द्वारा निर्देशित आखिरी फिल्म 'मुजीब: द मेकिंग ऑफ ए नेशन' की मेकिंग की कहानी...
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मुजीब-श्याम बेनेगल - फोटो : एक्स
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विस्तार
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श्याम बेनेगल का आज सोमवार, 23 दिसंबर को निधन हो गया। वे दो दिन पहले अपने घर पर गिर गए थे, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया। दो दिन से वे काेमा में थे और सोमवार शाम इलाज के दौरान उन्होंने आखिरी सांस ली। श्याम बेनेगल की आखिरी फिल्म 'मुजीब: द मेकिंग ऑफ ए नेशन' थी, जिसका उन्होंने निर्देशन किया था। निर्देशक की फिल्म 'मुजीब' ने भारत ही नहीं, बल्कि बांग्लादेश में भी सुर्खियां बटोरीं। यह फिल्म बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर्रहमान पर आधारित थी, जो बांग्लादेश के राष्ट्रपति भी थे। उनकी जिंदगी पर बनी फिल्म ने बांग्लादेश में 2024 में तख्तापलट करवा दिया था और शेक हसीना को इस्तीफा देना पड़ा था। आइए आपको बताते हैं श्याम की आखिरी फिल्म की मेकिंग की कहानी...

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मुजीबुर्रहमान के राजनीतिक सफर की शुरुआत
मुजीब: द मेकिंग ऑफ अ नेशन फिल्म अक्तूबर 2023 में सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। यह फिल्म दिखाती है कि मुजीबुर्रहमान के राजनीतिक सफर की शुरुआत कैसे हुई थी, उन्होंने किस तरह बांग्लादेश की स्वाधीनता के लिए काम किया। इस फिल्म को राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (NFDC) और बांग्लादेश फिल्म विकास निगम (BFDC) ने मिलकर बनाया था। इस फिल्म को बंगाली के साथ-साथ हिन्दी भाषा में भी रिलीज किया गया था। अरिफिन शुवू ने इसमें मुजीब का रोल प्ले किया था।

शेक हसीना ने दे दी थी बायोपिक की मंजूरी
बांग्लादेश के राष्ट्रपति शेख मुजीबुर्रहमान की बायोपिक मुजीब- द मेकिंग ऑफ ए नेशन भारत और बांग्लादेश के बीच सह-निर्माण समझौता था। जाहिर है, मुजीब की बेटी शेख हसीना ने बायोपिक के लिए अपनी पूरी सहमति दे दी थी। फिल्म की शूटिंग बांग्लादेश में हुई है। इस फिल्म का एलान करते हुए बेनेगल ने बताया था कि शेख मुजीबुर रहमान के जीवन को पर्दे पर उतारना उनके लिए एक कठिन काम रहा है। उन्होंने कहा था, 'मुजीब- द मेकिंग ऑफ ए नेशन मेरे लिए एक बहुत ही भावनात्मक फिल्म है। बंगबंधु के जीवन को पर्दे पर उतारना एक कठिन काम है। हमने उनके किरदार को बेबाकी से पेश किया है। मुजीब भारत के बहुत अच्छे दोस्त रहे।'

मुजीबुर्रहमान की बगावत
हिंदी सिनेमा के मशहूर एक्टर और डायरेक्टर रजित कपूर भी इस फिल्म का हिस्सा थे। उन्होंने इसमें पाकिस्तान के चौथे राष्ट्रपति और नौवें प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो का रोल निभाया था। गौरव शर्मा, महमूद सिद्दीकी, नुसरत इमरोज तिशा भी इस फिल्म में नजर आए थे। फिल्म में दिखाया जाता है कि जब पूर्वी पाकिस्तान ये मांग करती है कि बांग्ला को वहां की राष्ट्रभाषा बना दी जाए तो मुहम्मद अली जिन्ना ऐसा करने से साफ इनकार कर देते हैं। उसके बाद मुजीबुर्रहमान मुस्लिम लीग छोड़कर बांग्ला को राष्ट्रभाषा बनाने की मांग लिए मैदान में उतर जाते हैं।
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फिल्म की कहानी और श्याम का नजरिया
फिल्म की कहानी की शुरुआत होती है मुजीब के नौ महीने तक पाकिस्तान जेल में रहकर अपने देश में लौटने से, जब वो अपने देश लौटते हैं तो वो वहां के लोगों को बताते हैं कि उन्हें जेल में फांसी दी जाने वाली थी। वहीं इस फिल्म की कहानी का अंत उस सैन्य तख्तापलट के साथ होता है, जब उनके और उनके पूरे परिवार को मौत के घाट उतार दिया जाता है। किसी को भी बख्शा नहीं जाता है। उस वक्त शेख हसीना और उनकी बहन रेहाना इसलिए बच गई थीं, क्योंकि वो दोनों अपने परिवार से दूर जर्मनी में थीं। फिल्म को बनाते हुए श्याम बेनेगल ने कहा था कि शेख मुजीबुर रहमान के जीवन और राजनीति के प्रति मेरा गहरा आकर्षण रहा है। जब बांग्लादेश से उनके जीवन पर फिल्म बनाने का अवसर मेरे पास आया तो मैं इसके लिए तैयार हो गया।
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