शेखर सुमन बॉलीवुड के मशहूर अभिनेताओं में से एक हैं। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री को एक से बढ़कर एक हिट फिल्में दी हैं। फिल्मों के अलावा वे अपने टॉक शो के लिए भी काफी मशहूर हुए हैं। पुराने दिनों को याद करते हुए अभिनेता कहते हैं, 'मुझे पहले लगता था था कि जिंदगी में चमत्कार होते हैं, लेकिन मैं गलत था।
बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता शेखर सुमन इन दिनों चर्चा में बने हुए हैं। वे संजय लीला भंसाली की वेब सीरीज 'हीरामंडी द डायमंड बाजार' में अहम किरदार निभाते नजर आ रहे हैं। दर्शकों को उनका नवाबों वाला अंदाज काफी पसंद आ रहा है। वहीं पिछले दिनों अपने शो के प्रमोशन के दौरान अभिनेता अपनी जिंदगी के उतार-चढ़ाव के बारे में बातें करते दिखाई दिए।
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जिंदगी में चमत्कार नहीं होते
शेखर सुमन बॉलीवुड के मशहूर अभिनेताओं में से एक हैं। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री को एक से बढ़कर एक हिट फिल्में दी हैं। फिल्मों के अलावा वे अपने टॉक शो के लिए भी काफी मशहूर हुए हैं। पुराने दिनों को याद करते हुए अभिनेता कहते हैं, 'मुझे पहले लगता था था कि जिंदगी में चमत्कार होते हैं, लेकिन मैं गलत था। जब मेरा बेटा बीमार हुआ तब मैनें न जाने कितनी प्रार्थनाएं की, लेकिन उन प्रार्थनाओं का कोई असर नहीं हुआ'।
मन की शांति के लिए बौद्ध धर्म को अपनाया
शेखर सुमन अपनी बात जारी रखते हुए कहते हैं, 'जब हमें डॉक्टर ने कहा कि आयुष सिर्फ चंद महीनों का मेहमान है तब हमने अपनी तरफ से उसके इलाज में कोई कसर नहीं छोड़ा। हम उसे लंदन लेकर गए, लेकिन उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। उन दिनों मैं मन की शांति के लिए बौद्ध धर्म के मार्ग पर चल रहा था। बाद में आयुष को भ्रांतियां होने लगी। वह कुछ भी बोलने लगता था। अलका से उसकी हालत नहीं देखी जा रही थी। आप यकीन करेंगे एक दिन उसने खुद भगवान से प्रार्थना की कि आयुष को मुक्ति मिल जाए। एक मां के लिए इससे बड़ा दर्द क्या होगा'।
मेरे डॉक्टर पिता भी नहीं कुछ कर पाए
'हीरामंडी' स्टार शेखर सुमन के पिता डॉक्टर थे। शेखर कहते हैं, 'मेरे पिता डॉक्टर थे। उन्होंने कितने ही लोगों की जान बचाई थी, लेकिन अपने बच्चे के लिए वे कुछ भी कर नहीं पाए। हम सब असहाय महसूस कर रहे थे'।