फिल्मी पर्दे पर धमाकेदार डेब्यू
वर्ष 1964 में रिलीज हुई रोमांटिक फिल्म ‘कश्मीर की कली’ ने शर्मिला टैगोर को रातों-रात स्टार बना दिया। उनकी सुंदरता, बड़ी आंखें, मासूम मुस्कान और सहज अभिनय ने दर्शकों को तुरंत दीवाना बना दिया। यह फिल्म पहले किसी और अभिनेत्री के पास जाने वाली थी, लेकिन किस्मत ने यहां से उन्हें अपार सफलता दी। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
शशि कपूर पर था क्रश
70 के दशक में शशि कपूर और शर्मिला टैगोर की जोड़ी को दर्शक हाथों-हाथ लेते थे। दोनों ने करीब 9 फिल्में साथ कीं और कैमिस्ट्री इतनी सहज थी कि शर्मिला खुद भी शशि कपूर पर क्रश होने की बात स्वीकार कर चुकी हैं। हालांकि, यह पसंद सिर्फ दोस्ती की दहलीज़ तक ही रही और दोनों अपनी-अपनी जिंदगी में आगे बढ़ गए।
बॉलीवुड की सबसे सुपरहिट जोड़ी
अगर हिंदी सिनेमा में किसी जोड़ी ने लगातार हिट पर हिट दीं- तो वह राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर की जोड़ी थी। फिल्म ‘आराधना’, ‘अमर प्रेम’, ‘सफर’ जैसी फिल्मों ने दोनों को स्टारडम की चरम सीमा पर पहुंचा दिया। एक दौर ऐसा भी आया जब शर्मिला टैगोर इंडस्ट्री की सबसे अधिक फीस लेने वाली अभिनेत्री बन गईं। 1950-60 के दशक में यह उपलब्धि किसी भी महिला कलाकार के लिए असाधारण थी।
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पटौदी के नवाब पर दिल हारा और बनीं ‘आयशा बेगम’
फिल्मी फैन्स की भीड़ के बीच, शर्मिला टैगोर का दिल उस क्रिकेट स्टार पर आया जो कम बोलता था लेकिन हर काम शाही अंदाज़ में करता था- मंसूर अली खान पटौदी। दोनों की प्रेम कहानी बेहद सादा और दिल से जुड़ी हुई थी। शादी के लिए शर्मिला ने धर्म परिवर्तन कर ‘आयशा बेगम’ का नाम अपनाया। यही रिश्ता आगे चलकर बॉलीवुड के सबसे रॉयल परिवारों में गिना जाने लगा। उनके तीन बच्चे- सैफ अली खान, सोहा अली खान और सबा अली खान आज अपने-अपने क्षेत्र में स्थापित नाम हैं।