शाहरुख खान की बहन बोल नहीं सकी
शाहरुख खान ने कहा 'मुझे याद है कि मेरी बहन मेरे पिता की लाश के सामने खड़ी थी। वह सिर्फ देख रही थी, वह रोई नहीं, उसने कुछ नहीं कहा। वह बस गिरी और उसका सर जमीन से लगा। उसके बाद दो सालों तक वह रो नहीं सकी, वह बोल भी नहीं सकी, वह सिर्फ आसमान में देखती थी। इससे दुनिया बदल गई।'
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मां के गुजरने के बाद बढ़ गया दर्द
शाहरुख खान ने आगे कहा 'जब 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' फिल्म बन रही थी, तब वह दोबारा अस्पताल में भर्ती हुई। डॉक्टर्स ने कहा वह बच नहीं पाएगी। मैं उसे स्विटजरलैंड ले गया। जब मैं 'तुझे देखा तो ये जाना सनम' की शूटिंग कर रहा था तभी उसका इलाज कराया। लेकिन पिता के जाने के बाद वह कभी ठीक नहीं हो पाई। उसका दर्द तब दुगना हो गया जब पिता के गुजरने के 10 साल बाद मां भी गुजर गई। हम यतीम हो गए। मुसलमानों में यतीम उसे कहते हैं जिसके मां-बाप नहीं होते हैं।'
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अवसाद से बचने के लिए करता हूं काम
शाहरुख खान ने कहा कि 'मेरी बहन मुझसे अच्छी इंसान थी। मेरे बच्चे मुझसे ज्यादा उससे प्यार करते थे। हम उससे बहुत खुश थे। लेकिन मेरे अंदर बहुत सिंपल रहने का हुनर नहीं है। मैं परेशान नहीं रह सकता। इसलिए मैं काम करता रहता हूं। मेरे आस पास चीजें दुख भरी रहती हैं, फिर भी मैं अपने आपको खुश रखता हूं। मैं जोक्स करता रहता हूं। अगर मैं ऐसा नहीं करूंगा तो मैं भी अवसाद में चला जाउंगा। अवसाद को कम करने के लिए मैं अभिनय करता हूं। ये एक बड़े स्टार बनने और पैसा कमाने से ज्यादा है। यह सोने जैसा सच है।'