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Juhi Babbar: ‘रंगमंच सुनते ही झोला पकड़े गरीब इंसान की..’, जूही बब्बर ने संवाद में सुनाया दिलचस्प किस्सा

Sun, 20 Apr 2025 12:08 PM IST
ज्योति राघव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Juhi Babbar Soni at Samwad 2025: अभिनेत्री-निर्देशक और थिएटर कोच जूही बब्बर सोनी हाल ही में लखनऊ में आयोजित अमर उजाला संवाद में शिरकत करने पहुंचीं। इस दौरान उन्हें रंगमंच को लेकर कई दिलचस्प बातें साझा कीं।
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जूही बब्बर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मशहूर अदाकारा, निर्देशक और थिएटर आर्टिस्ट व कोच जूही बब्बर सोनी ने अमर उजाला के वैचारिक मंच संवाद में अपनी जिंदगी और करियर को लेकर कई बातें साझा कीं। वे लंबे वक्त से रंगमंच की दुनिया में सक्रिय हैं। उन्होंने इस क्षेत्र में अपनी मां नादिरा बब्बर को अपना गुरू बताया और कहा कि थिएटर की समझ मां से मिली। जूही ने कहा कि रंगमंच की सूरत हम कलाकारों को ही बदलनी पड़ेगी। उन्होंने इसे लेकर एक किस्सा भी सुनाया।

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जूही बब्बर - फोटो : इंस्टाग्राम-@juuhithesoniibabbar
थिएटर करने वालों का फर्ज है कि...
जूही बब्बर से संवाद में पूछा गया, 'आप जिस पैशन को जीती हैं यानी थिएटर को वह चैलेंजिंग हो रहा है। जो लोग इस तरफ आना चाहते हैं, आप क्या कहेंगी'? इस पर जूही बब्बर सोनी ने कहा, जहां तक बात थिएटर के चैलेंजिंग होने की है तो यह बिल्कुल चैलेंजिंग है, लेकिन जो लोग थिएटर कर रहे हैं, यह उन्हीं का फर्ज बनता है कि कुछ करें। आप अपनी कला के लिए क्या कर सकते हैं कि उसकी वैल्यू बढ़े? चाहें वह लोगों की नजर में आर्ट के रूप में हो या कमर्शियल, मैं दोनों तरह से बात करूंगी। आज नापने का तरीका कमर्शियल ज्यादा हो गया है कि क्या ये चीज हिट है? तभी लोग उसके पीछे जाते हैं।

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जूही बब्बर - फोटो : इंस्टाग्राम-@juuhithesoniibabbar
'थिएटर की टीम ट्रेन से यात्रा करे..., जूही ने सुनाया किस्सा
जूही बब्बर ने आगे कहा, 'जैसे ही आप रंगमंच की बात करते हैं तो आप झोला पकड़े एक इंसान की छवि बनाते हैं। वह भी थिएटर है, लेकिन सिर्फ वही थिएटर नहीं है। मेरी मां ने थिएटर कंपनी शुरू की थी तो लोग उम्मीद करते थे कि पूरी कंपनी ट्रेन से यात्रा करे। मां से कह देते थे कि आपको फ्लाइट टिकट दे देंगे। बाकी सब ट्रेन से ट्रैवल कर लेंगे। बेटे के जन्म के बाद मैंने ब्रेक लिया था, लेकिन जब कमबैक किया तो तीस-चालीस साल बाद भी मुझसे वही उम्मीद की गई कि जूही जी आपके लिए एयर टिकट का इंतजाम कर देंगे, बाकी ट्रेन से आ जाएंगे। मैंने इससे साफ मना कर दिया'।

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जूही बब्बर - फोटो : इंस्टाग्राम-@juuhithesoniibabbar
गंजी-चप्पल पहनकर थिएटर आने वालों से जताई नाराजगी
संवाद में जूही से पूछा गया कि थिएटर के दौरान दर्शकों का फोन बज जाए तो आप थिएटर छोड़ने की धमकी दे देती हैं? इस पर जूही बब्बर ने कहा, 'मेरा फोकस प्रभावित करेंगे तो असर होता है। थिएटर एक्टर को नजर आता है कि मेरे दर्शक क्या कर रहे हैं। थिएटर और फिल्मों में अंतर है। आप बाहर के देशों में देखिए लोग सज-धज कर थिएटर देखने जाते हैं, क्योंकि वो लोग सम्मान करते हैं जावेद कला का। थिएटर का। मुझे नफरत है जब मैं देखती हूं कि लोग गंजी-चप्पल पहनकर नाटक देखने आ रहे हैं। शॉर्टस पहनकर आ गए। मेरा बस चले तो उन्हें बैठने ही न दूं कि जाइए पहले आप ढंग के कपड़े पहनकर आइए। आर्मी के कुछ रूल होते हैं। इसी तरह आप अगर रंगमंच देखने जा रहे हैं, किसी कलाकार को देखने-सुनने जा रहे हैं तो सलीके से जाइए'।

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