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Anurag Kashyap : महंगी हिंदी फिल्मों के बुरे प्रदर्शन पर बोले अनुराग , कहा- अब सिनेमा जाना किफायती नहीं

Wed, 05 Jun 2024 05:00 PM IST
सर्वजीत कृष्णा एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

बॉलीवुड में फिल्म बनाने पर लागत बढ़ती जा रही है और इसके उलट बॉक्स ऑफिस पर उनके प्रदर्शन में लगातार गिरावट आ रही है। अब फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप ने इस विषय पर अपनी राय जाहिर करते हुए दक्षिण भारतीय फिल्मों की स्थिति को सराहा है। 

 
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अनुराग कश्यप - फोटो : इ्ंस्टाग्राम
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विस्तार
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बीते कुछ समय से हिंदी फिल्मों की कमाई में कमी आई है। कई भारी-भरकम बजट वाली फिल्में भी बॉक्स ऑफिस पर अपनी लागत तक नहीं निकाल सकी हैं। वहीं, कुछ फिल्मों को दर्शकों ने पहले दिन ही नकार दिया। इस साल भी अब तक की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म 'फाइटर' है, जिसके बजट को देखते हुए इसकी कमाई को बहुत अच्छा नहीं कह सकते। बॉलीवुड में लगातार महंगी होतीं फिल्मों पर अब निर्देशक अनुराग कश्यप ने बात की है। 

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मंहगी होती फिल्मों पर अनुराग कश्यप ने दी राय
बॉलीवुड फिल्मों के बॉक्स ऑफिस पर निरंतर होते खराब प्रदर्शन को लेकर फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप ने अपनी राय जाहिर की है। उन्होंने इस के पीछे कुछ वजहों को चिन्हित किया है और इसके समाधान का विचार भी सुझाया है। अनुराग ने फिल्मों के टिकट की कीमतों को भी सीमित करने की राय दी है, जो फिल्म के बजट को देखते हुए काफी हद तक बढ़ाया-घटाया जाता है।  इसके अलावा निर्देशक ने कहा की बॉलीवुड में फालतू खर्च काफी होते हैं। इसके अलावा फिल्में इस लिए भी महंगी हो गईं हैं क्योंकि उसके सितारों की मांगे बहुत ज्यादा होती हैं। 
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दक्षिण भारतीय फिल्मों की स्थिति को बताया बेहतर
अनुराग कश्यप ने एक बातचीत के दौरान कहा कि दक्षिण भारतीय फिल्मों की स्थिति हिंदी फिल्मों से काफी अलग है। उन्होंने कहा कि वहां की फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर किसी सूखे का सामना नहीं करना पड़ता। निर्देशक ने कहा, "हमारे पास हिंदी सिनेमा के समझदार दर्शक नहीं हैं, जिस वजह से फिल्म का व्यवसाय प्रभावित होता है। केरल के पास सिनेमा की समझ रखने वाले बुद्धिमान दर्शक हैं। वे सिर्फ अच्छी फिल्में ही नहीं बना रहे हैं, बल्कि वे लगातार हिट फिल्में भी दे रहे हैं"। उन्होंने ने आगे कहा कि तेलुगु में टिकट की कीमत की एक सीमा होती है, फिर चाहे कोई 'आरआरआर' बनाए या कोई छोटी फिल्म। 
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'फिल्में देखने जाना किफायती नहीं'
नायकों के नाम पर फिल्में देखने वाले दर्शकों को भी निर्देशक ने आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा, "हमारे यहां नायकों को पूजने वाले दर्शक हैं। हमारे देश की आबादी बहुत ज़्यादा है, फिर भी चीन की तुलना में, हमारे पास सिनेमाघरों की संख्या बहुत कम है"। सिनेमाघरों द्वारा अच्छा व्यवसाय ना कर पाने पर उन्होंने कहा, "क्योंकि फिल्म देखने जाना किफायती नहीं है। दूसरे देशों में अगर आप थिएटर में अकेले हैं, तो भी फिल्म चल जाएगी। यहां अगर उन्हें एक निश्चित संख्या में दर्शक नहीं मिलते, तो वे शो रद्द कर देते हैं"। इस दौरान निर्देशक ने फिल्मों के टिकट की कीमत भी कम करने की वकालत की है। 
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