आर्यन खान और द बैड्स ऑफ बॉलीवुड
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सीरीज का उद्देश्य किसी की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाना नहीं
आगे कहा गया है कि व्यंग्य व्यंग्यकार को कठोरतम शब्दों में आलोचना करने की अनुमति देता है और इसका उद्देश्य प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाना या नुकसान पहुंचाना नहीं है। टिप्पणी व्यंग्यात्मक है या दुर्भावनापूर्ण, यह केवल मुकदमे के दौरान ही तय हो सकता है। रेड चिलीज ने यह भी तर्क दिया है कि वानखेड़े एक पब्लिक एम्प्लॉय होने के नाते सार्वजनिक जांच का सामना करने के लिए तैयार हैं।
सार्वजनिक पदों पर आसीन लोगों को बहुत ज्यादा संवेदनशील नहीं होना चाहिए। जिस व्यक्ति का आचरण आधिकारिक जांच का विषय रहा हो, वह निष्पक्ष टिप्पणी या व्यंग्य से विशेष सुरक्षा का दावा नहीं कर सकता। वानखेड़े की याचिका को अतिसंवेदनशीलता के आधार पर खारिज कर दिया जाना चाहिए। कंपनी ने कहा कि विवादित क्लिप को हटाने से पूरी सीरीज की कहानी प्रभावित हो जाएगी। वानखेड़े को हुई किसी भी कथित चोट की भरपाई हर्जाने से की जा सकती है। लेकिन क्रिएटिव लिबर्टी के मामले में सिर्फ कहना एक खतरनाक मिसाल कायम कर सकता है।
10 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
दिल्ली उच्च न्यायालय में इस मामले पर अब अगली सुनवाई 10 नवंबर को होगी। जिसे न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव सुनेंगे। के समक्ष सूचीबद्ध की है। पिछली सुनवाई पर न्यायालय ने वानखेड़े की याचिका पर नेटफ्लिक्स, रेड चिलीज और अन्य को नोटिस जारी किया था। इसमें कथित मानहानि के लिए स्थायी रोक और 2 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की गई थी।