कमर्शियल और कंटेंट-ड्रिवन सिनेमा का बैलेंस कैसे रखती हैं?
बैलेंस उतना मुश्किल नहीं है जितना लोग सोचते हैं। इसके लिए आपको खुद ओपन रहना पड़ता है। मैं मेकर्स को खुद बोलती हूँ कि मुझे ऑडिशन करने दें, ताकि मुझे कंटेंट वाली फिल्में भी मिलें। लेकिन मैं कमर्शियल सिनेमा की पकड़ भी नहीं छोड़ती क्योंकि मुझे दोनों पसंद हैं। ये बैलेंस आपको खुद ही बनाए रखना पड़ता है।
क्या कोई ऐसा ड्रीम रोल है जिसे निभाने की आपकी बहुत इच्छा है, लेकिन अभी तक मौका नहीं मिला?
मुझे लगता है कि मैंने अभी शुरुआत ही की है। मेरे कई ड्रीम रोल्स हैं। मुझे एक्शन फिल्म करनी है, पीरियड फिल्म करनी है और अगर दोनों साथ मिल जाएं तो बहुत अच्छा होगा। मुझे हिंदी में रोमैंटिक कॉमेडी और साइकोलॉजिकल थ्रिलर भी करना है।
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आपकी पढ़ाई आपकी एक्टिंग या स्क्रिप्ट एनालिसिस के तरीकों को प्रभावित करती है?
मेरी पढ़ाई ने मेरी एक्टिंग में बहुत मदद की है। मैं हर किरदार को केस स्टडी की तरह पढ़ती हूं। मैं उसका पास्ट, फियर्स और कोपिंग मेकैनिज्म खोजती हूं। मैं सिर्फ ये नहीं देखती कि किरदार क्या बोल रहा है। मैं समझने की कोशिश करती हूं कि वो ऐसा क्यों बोल रहा है। इंग्लिश ऑनर्स ने मुझे सही सवाल पूछना सिखाया और यही ट्रेनिंग फिल्मों में काम आती है। मैं अपने किरदारों को कभी जज नहीं करती। मैं उन्हें समझती हूं।
आने वाले कुछ वर्षों में आप अपने करियर को किस दिशा में देखती हैं?
पहले मैं अपने करियर के बारे में बहुत नहीं सोचती थी। मैं बस मेहनत करती थी। लेकिन अब मैं कॉन्शस डिसीजन लेती हूं। आने वाले समय में मैं अपने काम में मेच्योरिटी और डेप्थ लाना चाहती हूं। मैं ऐसे किरदार करना चाहती हूँ जो लेयर्ड, फ्लॉड और कॉम्प्लेक्स हों। मेरा लक्ष्य है कि मेरा कलाकार हमेशा ज़िंदा रहे।