एनएसडी ने भेजा न्योता
इस फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक रामकमल मुखर्जी ने बनाया है। फिल्म में मुख्य भूमिका में अभिनेत्री रुक्मिणी मैत्रा हैं। एनएसडी के डीन चित्तरंजन त्रिपाठी ने निर्देशक रामकमल और रुक्मिणी को बाकायदा निमंत्रण भेजा है। बंगाली क्षेत्रीय फिल्म के इतिहास में यह पहला निमंत्रण पत्र है, जो किसी बंगाली निर्देशक को एनएसडी ने भेजा है। इसमें लिखा है, 'राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की ओर से हमें छात्रों के साथ विशेष बातचीत के लिए निर्देशक रामकमल मुखर्जी और रुक्मिणी मैत्रा का स्वागत करते हुए गर्व हो रहा है। बिनोदिनी दासी और बंगाल थिएटर की विरासत और जीवन को सिल्वर स्क्रीन पर लाने में आपकी पहल का जश्न मनाते हुए बतौर मुख्य अतिथि एनएसडी में आमंत्रित करते हुए हमे खुशी हो रही है'।
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'बिनोदिनी एकती नातिर उपाख्यान'
- फोटो : साभार-imdb
निर्देशक रामकल ने जताई खुशी
इस निमंत्रण को पाकर रामकमल मुखर्जी और रुक्मिणी मैत्रा की खुशी का ठिकाना नहीं। रामकमल मुखर्जी ने कहा, 'एनएसडी के छात्रों और शिक्षकों के साथ बातचीत करना मेरे और मेरी टीम 'बिनोदिनी एकती नातिर उपाख्यान' के लिए एक बड़ा सम्मान है'। वहीं, अभिनेत्री रुक्मिणी मैत्रा पहली बार एनएसडी जाएंगी। बता दें कि एनएसडी की स्थापना 1959 में हुई। बाद में यह स्वतंत्र स्कूल 1975 में बना। एनएसडी ने कई बड़े सितारे सिनेमा की दुनिया को दिए हैं।
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कौन थीं बिनोदिनी दासी?
बिनोदिनी दासी फिल्मों के साथ-साथ बंगाली रंग-मंच का भी बड़ा नाम थीं। उन्होंने स्टेज पर कई चुनौतीपूर्ण किरदार अदा किए थे। वह अपने किरदारों के साथ प्रयोग करने में माहिर थीं। रंगमंच पर चैतन्य महाप्रभु का चरित्र निभाकर बिनोदिनी दुनिया भर में मशहूर हो गईं थीं। रंगमंच पर निभाई इस भूमिका ने बिनोदिनी दासी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक बिनोदिनी दासी ने महज 12 वर्ष की उम्र में अभिनय शुरू कर दिया था। उन्होंने प्रमिला, सीता, द्रौपदी, राधा, आयशा, कैकेयी, मोतीबाई और कपालकुंडला समेत 80 से अधिक अहम किरदार अदा किए।
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