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राज कुमार की 100वीं जयंती: न फिल्म की परवाह, न सितारों का डर… कुछ ऐसी थी शख्सियत; पढ़ें डायलॉग्स जो बने पहचान

Thu, 08 Oct 2026 06:22 AM IST
राजश्री वर्मा एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Raaj Kumar 100th Birth Anniversary: दिग्गज दिवंगत अभिनेता राज कुमार अपनी दमदार आवाज, बेबाक अंदाज और यादगार डायलॉग्स के लिए आज भी दर्शकों के दिलों में जिंदा हैं। पुलिस की नौकरी छोड़कर फिल्मों में आए राज कुमार ने करीब चार दशक के करियर में 70 से अधिक फिल्मों में काम किया। आज उनकी 100 जयंती है। इस मौके पर जानें अभिनेता की जिदंगी से जुड़े दिलचस्प किस्सों के बारे में...
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राज कुमार - फोटो : अमर उजाला
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'न तलवार की धार से.... न गोलियों की बौछार से... बंदा डरता है तो सिर्फ परवरदिगार से।'
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‘जानी, जिनके अपने घर शीशे के होते हैं … वो दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं फेंका करते।’


ये डायलॉग सुनते ही सबसे पहले लोगों के जहन में जो चेहरा आता है, वह दिवंगत दिग्गज अभिनेता राज कुमार का है। बॉलीवुड में 'जानी' के नाम से मशहूर राज कुमार की आज 100वीं जन्मतिथि है।

राज कुमार का जन्म 8 अक्टूबर, 1926 को लोरलाई, पाकिस्तान में हुआ था। बेशक दिग्गज अभिनेता आज हमारे बीच न हो, लेकिन वह अपनी फिल्मों, दमदार डायलॉग के लिए हमेशा अमर रहेंगे। अभिनेता की पुण्यतिथि पर उनकी लाइफ से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्सों के बारे में जानते हैं।
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राज कुमार - फोटो : X
पुलिस की वर्दी से फिल्मी पर्दे तक
राज कुमार का असली नाम कुलभूषण नाथ पंडित था। फिल्मों में आने से पहले वह मुंबई पुलिस में सब-इंस्पेक्टर थे और महिम पुलिस स्टेशन में तैनात रहे। उनके अभिनेता बनने की कहानी भी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है।

बताया जाता है कि एक बार वह ड्यूटी के दौरान मेट्रो सिनेमा गए थे, जहां फिल्मकार सोहराब मोदी की नजर उन पर पड़ी। मोदी ने उन्हें फिल्म में काम करने का प्रस्ताव दिया, लेकिन राज कुमार ने तत्काल उसे स्वीकार नहीं किया। बाद में उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम रखा और 1952 की 'रंगीली' से फिल्मों में शुरुआत की।

राज कुमार - फोटो : सोशल मीडिया
राजेश खन्ना और जितेंद्र को 'जूनियर आर्टिस्ट' कहना
राज कुमार के आत्मविश्वास से जुड़े सबसे चर्चित किस्सों में एक अभिनेता मुकेश खन्ना ने सुनाया था। उनके मुताबिक, एक बार राज कुमार सेट की तरफ जा रहे थे। वहां उन्होंने राजेश खन्ना, जितेंद्र और कुछ दूसरे कलाकारों को खड़ा देखा। राज कुमार ने निर्देशक से कहा कि काफी जूनियर आर्टिस्ट जमा करके रखे हुए हैं आपने।

राज कुमार - फोटो : X
प्रशंसकों से बचने के लिए नदी में लगाते थे कुर्सी
राज कुमार के व्यक्तित्व का शायद सबसे मजेदार किस्सा 'सौदागर' के एक्शन डायरेक्टर रवि दीवान ने बताया था। उस समय फिल्म की शूटिंग कुल्लू-मनाली में हो रही थी। वहां पर्यटक और नवविवाहित जोड़े कलाकारों के साथ तस्वीरें खिंचवाने पहुंचते थे। राज कुमार को भीड़ पसंद नहीं थी।

रवि दीवान ने बताया कि एक दिन राज कुमार अपनी कुर्सी उठाकर बहते हुए पानी के बीच जाकर बैठ गए। पानी घुटनों तक था। जब सुभाष घई ने इसका कारण पूछा तो राज कुमार ने जवाब दिया कि यहां फोटो खिंचाने कोई नहीं आएगा।'





जब अभिनेता ने ठुकरा दी थी 'जंजीर'
राज कुमार से जुड़ा सबसे प्रसिद्ध किस्सा 'जंजीर' को लेकर है। कहा जाता है कि प्रकाश मेहरा ने उन्हें फिल्म ऑफर की थी, लेकिन उन्होंने फिल्म इसलिए ठुकरा दी क्योंकि उन्हें निर्देशक का चेहरा पसंद नहीं आया। वहीं, कई जगह यह भी कहा जाता है कि राज कुमार ने प्रकाश महरा से कहा था कि तुम्हारे पास से बिजनौरी तेल की बदबू  आ रही है। हम फिल्म तो दूर तुम्हारे साथ एक मिनट खड़ा होना भी बर्दाश्त नहीं कर सकते।

राज कुमार - फोटो : एक्स @FilmHistoryPic
रामानंद सागर से कही थी ये बात
फिल्म 'आंखें' में रामानंद सागर, राज कुमार को कास्ट करना चाहते थे पर राज कुमार को कहानी पसंद नहीं आई। इसके बाद उन्होंने अपने पालतू कुत्ते को आवाज लगाई और पूछा कि क्या वह इस फिल्म में रोल करना चाहता है? इसके बाद उन्होंने रामानंद सागर से कहा कि देखो यह रोल तो मेरा कुत्ता भी नहीं करना चाहता।

राज कुमार - फोटो : एक्स @FilmHistoryPic
गोविंदा की शर्ट का बना दिया था रुमाल
80 के दशक की बात है उस समय गोविंदा और राज कुमार फिल्म 'जंगबाज' की शूटिंग कर रहे थे। शॉट देने के बाद गोविंदा, राज कुमार के साथ बैठ गए। गोविंदा ने जो शर्ट पहनी थी, वह राज कुमार को पसंद आई। इस बात के बारे में जब राज कुमार ने गोविंदा को बताया तो उन्होंने फौरन अपनी वह शर्ट अभिनेता को दे दी। लेकिन, कुछ दिन बाद राज कुमार गोविंदा के इसी शर्ट का रुमाल अपने जेब में डालकर घूम रहे थे।

राज कुमार का करियर और फिल्में
  • अभिनेता ने अपने 40 साल के करियर में उन्होंने लगभग 70 फिल्मों में काम किया।
  • 'दिल एक मंदिर' और 'वक्त' के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार जीता।
  • अभिनेता को असली पहचान 1957 की फिल्म 'नौशेरवां-ए-आदिल' और 'मदर इंडिया' से मिली।
  • इसके बाद उन्होंने 'पैगाम', वक्त, पाकीजा, 'हीर रांझा', 'लाल पत्थर', 'सौदागर' और 'तिरंगा' जैसी कई हिट फिल्में दीं।
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राज कुमार - फोटो : सोशल मीडिया
फ्लाइट अटेंडेंट से की शादी
एक बार सफर के दौरान राज कुमार की मुलाकात जेनिफर से हुई, जो एक फ्लाइट अटेंडेंट थी। बाद में राज कुमार ने जेनिफर ने शादी कर ली और जेनिफर ने अपना नाम बदलकर 'गायत्री' रख लिया। दोनों को तीन बच्चे हुए, जिनमें दो बेटे पुरू राज कुमार और पाणिनि राज कुमार और एक बेटी वास्तविकता राज कुमार थी।

आखिरी समय तक जिंदगी को निजी रखना
राज कुमार की जिंदगी का सबसे गंभीर और मार्मिक पहलू उनका अंतिम समय था। 1996 में 69 वर्ष उम्र में गले का कैंसर की वजह से उनका निधन हुआ। बाद में मुकेश खन्ना ने एक इंटरव्यू में बताया कि राज कुमार ने अपनी बीमारी को बेहद निजी रखा था। वह चाहते थे कि उनकी मृत्यु की खबर फिल्म इंडस्ट्री में फैलने से पहले उनका अंतिम संस्कार हो जाए और ऐसा ही किया गया।
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