सितार सीखने के लिए छोड़ना पड़ा डांस
1934 में रविशंकर के भाई उदय शंकर ने मैहर घराने के मशहूर संगीतकार उस्ताद अल्लाउद्दीन खान को सुना और इसके बाद उन्हें 1935 में अपने डांस ग्रुप के साथ प्रमुख कलाकार के रूप में यूरोप ले जाने के लिए राजी किया। इसी दौरान रविशंकर ने उस्ताद अलाउद्दीन खां से कुछ-कुछ संगीत सीखा। लेकिन सितार को सुनने के बाद रविशंकर का मन सितार में लग गया और वो उसकी शिक्षा लेने के लिए उस्ताद अलाउद्दीन खां के पास पहुंचे। मगर उस्ताद अलाउद्दीन खां ने रविशंकर को सितार सिखाने के लिए एक शर्त रख दी कि उन्हें अपने डांस को पूरी तरह से छोड़ना पड़ेगा।
इसके बाद रविशंकर ने डांस को छोड़ दिया और 18 साल की उम्र में साल 1938 में उस्ताद अलाउद्दीन खान से सितार वादन की शिक्षा लेना प्रारंभ किया। तकरीबन 7 साल तक रविशंकर ने मैहर घराने में रहकर उस्ताद अलाउद्दीन खां से सितार की शिक्षा हासिल की और फिर वो सितार वादन में पारंगत हो गए। इस दौरान उन्होंने शास्त्रीय संगीत की भी शिक्षा ली और द्रुपद, ख्याल आदि भी सीखा।
सात साल तक रहे ऑल इंडिया रेडियो के म्यूजिक डायरेक्टर
1944 में अपना प्रशिक्षण पूरा करने के बाद रविशंकर मुंबई चले गए और वहां इंडियन पीपल्स थिएटर एसोसिएशन में शामिल हो गए। इनके लिए उन्होंने 1945 में बैलेट्स और 1946 में धरती के लाल के लिए संगीत तैयार किया। 25 साल की उम्र में उन्होंने ‘सारे जहां से अच्छा’ की धुन को फिर से तैयार किया। वो 1949 से 1956 तक ऑल इंडिया रेडियो के संगीत निर्देशक रहे। रविशंकर ने एआईआर में इंडियन नेशनल ऑर्केस्ट्रा की स्थापना की और इसके लिए संगीत तैयार किया।
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पूरे विश्व में गूंजी पंडित रविशंकर के सितार की धुन
1960 का दशक आते-आते पंडित रविशंकर विश्व विख्यात हो गए थे और उनके संगीत की दीवानी पूरी दुनिया होने लगी थी। भारत से लेकर विदेशों तक में उनके सितार की धुन अब गूंज रही थी। वो लगातार लंदन, पेरिस, न्यूयॉर्क समेत दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जाकर अपने शो करने लगे। यहां तक कि उस समय का मशहूर बीटल्स बैंड भी पंडित रविशंकर के संगीत का दीवाना था।
पंडित रविशंकर को मिले सम्मान
- फोटो : अमर उजाला
ऑस्कर के लिए मिला नॉमिनेशन
पूरी दुनिया में अपने संगीत का डंका बजाने के बाद पंडित रविशंकर ने फिल्मों में भी संगीत दिया। उन्होंने संगीतकार के रूप में सत्यजीत रे की ‘अपू ट्रिलॉजी’ और रिचर्ड एटनबर्ग की ‘गांधी’ के लिए संगीत दिया। उन्हें 1983 में ‘गांधी’ फिल्म के लिए बेस्ट ओरिजिनल स्कोर की कैटेगरी में ऑस्कर के लिए नामांकित किया गया था। हालांकि, वो जॉर्ज फेंटन के साथ ऑस्कर जीतने में सफल नहीं हो सके थे।
सितार सीखने आया था बीटल्स गैंग का मशहूर गिटारिस्ट
बीटल्स बैंड के गिटारिस्ट जॉर्ज हैरिसन रविशंकर के सितार वादन से इतना प्रभावित हुए कि वो उनसे सितार सीखने के लिए भारत आए थे। उन्हें भारत यात्रा से पहले रविशंकर ने सलाह दी थी कि वो भारत आएं तो भेष बदलकर आएं, ताकि लोग उन्हें पहचान न सकें। इसके बाद रविशंकर जॉर्ज हैरिसन को श्रीनगर ले गए, जहां उन्होंने हाउसबोट में रहकर हैरिसन को संगीत की शिक्षा दी।
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महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के लिए बिना तबले के संगीत के बजाया सितार
पंडित रविशंकर के बारे में एक किस्सा काफी प्रसिद्ध है। ऐसा बताया जाता है कि जब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का निधन हुआ तो श्रद्धांजलि सभा में उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए पंडित रविशंकर को बुलाया गया। इस दौरान उनसे बिना तबले के संगीत के सितार बजाने के लिए कहा गया। तब उन्होंने ‘गा नि धा’ राग बजाया। इस राग को उन्होंने ‘मोहनकौंस’ नाम दिया। क्योंकि इस राग से गांधी के नाम के सुर निकले थे।
तैयार की दूरदर्शन की थीम धुन
अपने सितार की धुन से हर किसी को मंत्रमुग्ध करने वाले पंडित रविशंकर ने दूरदर्शन की थीम ट्यून को भी कंपोज किया है। दूरदर्शन की जो प्रमुख धुन आप सुनते हैं, उसे पंडित रविशंकर ने ही तैयार किया था।
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अपने गुरु की बेटी से की शादी, बाद में दोनों हो गए अलग
अपने सितार की धुन से हर किसी का मन मोह लेने वाले लीजेंड्री पंडित रविशंकर ने अपने गुरु उस्ताद अलाउद्दीन खां की बेटी से ही शादी की थी। अपने गुरु से संगीत सीखने जाने के दौरान रविशंकर और गुरु की बेटी अन्नपूर्णा के बीच प्यार बढ़ा और साल 1941 में उन्होंने अन्नपूर्णा देवी से शादी कर ली। दोनों तकरीबन 20 साल तक साथ रहे और उनकी शादी अच्छी चली। हालांकि, बाद में दोनों अलग हो गए।
अगर पंडित रविशंकर शास्त्रीय संगीत की दुनिया में नाम कमा रहे थे और अपना अलग मुकाम हासिल कर रहे थे। तो उनकी पत्नी अन्नपूर्णा देवी भी काफी मशहूर थीं। वो हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की प्रसिद्ध भारतीय सुरबहार वादक थीं। अन्नपूर्णा देवी अपने पिता की शिष्या थीं। ऐसा कहा जाता है कि एक वक्त ऐसा था कि अन्नपूर्णा देवी का रुतबा संगीत की दुनिया में अपने पति रवि शंकर से बड़ा हो गया। इसी को लेकर दोनों के रिश्तों में भी तनाव पैदा होने लगा, जो उनके अलग होने का भी एक कारण बना।
काफी चर्चा में रही व्यक्तिगत जिंदगी
पंडित रविशंकर की व्यक्तिगत जिंदगी काफी चर्चा में रही। अन्नपूर्णा देवी से अलग होने के बाद उनकी जिंदगी में कमला देवी नाम की एक क्लासिकल डांसर आईं। पंडित रविशंकर कई सालों तक कमला देवी के साथ लिव इन में रहे। हालांकि, बाद में दोनों का रिश्ता टूट गया। कमला देवी से अलग होने के बाद पंडित रविशंकर न्यूयॉर्क की कॉन्सर्ट प्रोड्यूसर सू जोन्स के संपर्क में आए। दोनों के लिव इन में रहते हुए सू जोन्स ने एक बेटी को जन्म दिया, जिसका नाम नोराह जोन्स है। नोराह भी एक एक सिंगर और सितार वादक हैं। इसके बाद 1981 में रविशंकर की जिंदगी में एक और महिला की एंट्री हुई, सुकन्या राजन। सुकन्या राजन से पंडित रविशंकर ने दूसरी शादी भी की और दोनों की एक बेटी भी है, जिसका नाम अनुष्का शंकर है। वो भी एक संगीतकार और सितार वादक है।
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पंडित जी की लवस्टोरी पर पर बनी फिल्म ‘अभिमान’
पंडित रविशंकर की लव स्टोरी पर एक फिल्म भी बनी है। जी हां, अमिताभ बच्चन और जया बच्चन स्टारर ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म ‘अभिमान’ पंडित रविशंकर और अन्नपूर्णा देवी के जीवन पर ही आधारित है। ऐसा कहा जाता है कि दोनों के अलग होने के बाद इस फिल्म को बनाने से पहले निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी खुद पंडित रविशंकर की पूर्व पत्नी अन्नपूर्णा देवी के पास गए थे और उनसे इजाजत मांगी थी। उनकी अनुमति के बाद ही उन्होंने फिल्म बनाई थी।