फिल्म में पसंद आई ये चीज
उन्होंने आगे कहा, 'हर कोई इसके पीछे इतना पागल क्यों है? मुझे इसके सेट्स और आउटफिट्स समझ में आते हैं, लेकिन कहानी? हम शराब पीने को इतना ग्लैमरस क्यों बना रहे हैं?'
यूजर्स ने दी प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया यूजर्स ने दनानीर की टिप्पणियों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
एक यूजर ने लिखा, 'हे भगवान, यह कितनी असहनीय है। मैं तो पूरा क्लिप भी नहीं देख पाया। कोई प्लीज इसे बिठाकर समझाए कि साहित्यिक अर्थों में 'त्रासदी' किसे कहते हैं। इससे बेहतर यह है कि इसे माइक देना ही बंद कर दें और हम सबको इस परेशानी से बचा लें।'
एक दूसरे यूजर ने लिखा 'कितनी बेवकूफी भरी राय है। यह उन महानतम क्लासिक्स में से एक की बुराई कर रही है, जिसे अब तक के सबसे महान नाटककारों में से एक ने लिखा है। इसीलिए शिक्षा जरूरी है। कोई भी ऐरा-गैरा इंसान माइक पकड़कर बकवास करने लगे- यह सब अब बंद होना चाहिए।'
तीसरे यूजर ने लिखा ''देवदास' एक सिनेमाई मास्टरपीस है। इसका मूल उपन्यास अपने आप में साहित्य का एक खूबसूरत नमूना है। यह उन लोगों के लिए नहीं है जिन्हें सिर्फ मसाला फिल्में पसंद आती हैं।'
एक और यूजर ने लिखा है 'दनानेर अटेंशन पाने की भूखी है! हमेशा शॉर्टकट अपनाकर मशहूर होने की कोशिश करती है!'
'मेरा ल्यारी' में आईं नजर
दनानीर हाल ही में रिलीज हुई फिल्म 'मेरा ल्यारी' में नजर आने के बाद भारत में भी सुर्खियों में आ गई थीं। इस फिल्म को बॉलीवुड फिल्म 'धुरंधर' का पाकिस्तान की तरफ से जवाब बताया जा रहा है। वह कई पाकिस्तानी टीवी शोज में भी नजर आई हैं।
कब रिलीज हुई देवदास?
2002 में रिलीज हुई फिल्म 'देवदास' शरत चंद्र चट्टोपाध्याय के 1917 के उपन्यास पर आधारित है। इस कहानी पर कई फिल्में बन चुकी हैं।