चकाचौंध भरी फिल्मी दुनिया में ऊंचे मकाम पर पहुंचने के लिए कई कलाकारों ने बहुत मेहनत की है। 'बाहुबली' फिल्म में भल्लालदेव के पिता का किरदान निभाने वाले नास्सर उन कलाकारों में से एक हैं। उन्होंने यहां तक पहुंचने के लिए बहुत संघर्ष किया है। उन्होंने अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष के दिनों में वेटर और सिक्योरिटी गॉर्ड तक की नौकरी की। नास्सर ने न सिर्फ साउथ की फिल्मों में अपना नाम कमाया है बल्कि उन्होंने हिंदी सिनेमा में भी खूब काम किया है। अपने फिल्मी करियर में नास्सर ने 700 से ज्यादा फिल्में की हैं। आज नास्सर के जन्मदिन के मौके पर आपको बताते हैं उनके दिलचस्प किस्से।
वेटर और सिक्योरिटी गॉर्ड की नौकरी की
नायक से ज्यादा खलनायक के लिए मशहूर नास्सर आज अपना 67वां जन्मदिन मना रहे हैं। उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरूआत 1985 में आई तेलुगू फिल्म 'कल्याण अगथिगल' से की थी। वह फिल्मों में काम करने के शौकीन थे। फिल्मों में छोटे रोल पाकर भी वह खुश रहते थे। शुरूआत में उन्हें फिल्मों में उतना काम नहीं मिलता था कि उनका खर्च चल सके, इसलिए उन्होंने कभी वेटर तो कभी सिक्योरिटी गार्ड तक की नौकरी की थी। तमाम दिक्कतों के बावजूद फिल्मों से उनका लगाव रहा और वह कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ते गए। आज वह एक कामयाब अभिनेता के तौर पर जाने जाते हैं।
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नास्सर
- फोटो : फोटो- अमर उजाला
गरीबी और नाक को लेकर मारे गए ताने
नास्सर आज एक बड़ा नाम है लेकिन एक वक्त था, जब उन्हें उनकी नाक और गरीबी की वजह से ताने मारे गए। द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक नास्सर ने बताया कि वह मुस्लिम थे और गरीब थे इसलिए उन्हें खूब ताने सुनने को मिले। उन्होंने बताया कि लोगों को लगता था कि उनका सिर बड़ा है और उनकी नाक तोते जैसी है। उन्होंने बताया कि 'लोग कहते थे कि ये हीरो तो नहीं बल्कि फिल्मों में विलेन बहुत अच्छा बनेगा।'
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लगान में काम न कर पाने का आज भी है मलाल
एक इंटरव्यू में नास्सर ने यह बात कबूल की है कि उन्हें 'लगान' फिल्म न कर पाने का मलाल है। 'लगान' के फिल्म निर्माताओं ने नास्सर से फिल्म में काम करने के लिए संपर्क किया था। फिल्म में उन्हें अभिनेत्री के पिता का रोल निभाने का मौका मिल रहा था। उन्हें फिल्म में क्रिकेट भी खेलना था लेकिन उन्हें थोड़ा शक था कि वह यह कर पाएंगे या नहीं। 'लगान' की शूटिंग के दौरान नास्सर को 'लगान' टीम के साथ 90 दिनों तक रहना था। चूंकि नास्सर उसी दौरान तमिल और तेलुगू फिल्मों में काम कर रहे थे इसलिए वह 'लगान' का हिस्सा नहीं बन पाए। नास्सर ने इंटरव्यू में बताया 'मैं बदकिस्मत था कि उन्होंने जो मांगा, वह मैं नहीं दे पाया।'
दोस्त पूजा घर में सोने की जगह दी
नास्सर के मुताबिक संघर्ष के दिनों में उनके पास रहने को घर नहीं था, तब एक दोस्त ने उन्हें अपने पूजा घर में सोने की जगह दी। नास्सर चाहते थे कि वह ऐसा काम करें जिससे उनको हर महीने पैसे मिलते रहें लेकिन उनके पिता उन्हें एक्टर बनाना चाहते थे। उन्हें भारतीय वायूसेना में नौकरी मिली लेकिन उनके पिता ने उन्हें एक्टर बनाना चाहते थे। आखिरकार नास्सर ने अपने पिता की बात मानी और वह एक्टर बने।
नास्सर
- फोटो : फोटो- अमर उजाला
हिंदी फिल्मों में भी निभाया दमदार किरदार
नास्सर को सबसे ज्यादा पहचान 'बाहुबली' फिल्म से मिली। इसमें उन्होंने भल्लालदेव के पिता 'बिज्जलदेव' का किरदार अदा किया। उनकी सबसे ज्यादा मशहूर फिल्मों में 'इरुवर', 'वीरम' और 'थलाइवा' हैं। उन्होंने हिंदी की मशहूर फिल्मों में अच्छा काम किया है। उनकी हिंदी की फिल्मों में 'रोजा', 'खुशी', 'चाची 420', 'अंगरक्षक', 'रावड़ी राठौर' और 'रमैया वस्तावैया' हैं।
नस्सर के बारे में खास
नास्सर का असली नाम होम्मद हनीफ है। वह 5 मार्च 1958 को पैदा हुए। वह अभिनेता, निर्देशक, प्रोड्यूसर, गायक और राजनीतिज्ञ भी हैं। उन्होंने तेलुगू, तमिल और मलयालम फिल्मों में खूब काम किया है। उन्होंने बंगाली, कन्नड़ और अंग्रेजी के अलावा हिंदी फिल्मों में भी खूब काम किया है। नास्सर को बेहतरीन काम के लिए पांच बार 'तमिलनाडु स्टेट फिल्म अवॉर्ड' मिल चुका है।