हिंदी सिनेमा के दिग्गज कास्टिंग डायरेक्टर्स में शुमार मुकेश छाबड़ा ने देश के तकरीबन सारे हिंदी भाषी राज्यों के बड़े शहरों में अपनी शाखाएं खोल दी हैं। उनकी टीम वहां जाकर इन शहरों के कलाकारों की सूची बनाती है। फिर मुकेश छाबड़ा खुद जाकर इन कलाकारों को अभिनय की टिप्स देते हैं। ऐसी वर्कशॉप उनके नाम पर यहां मुंबई में भी खूब होती हैं। कुछ में वह खुद अभिनय पढ़ाते हैं। कुछ में रंगमंच के उस्ताद अभिनय पढ़ाने आते हैं। मुकेश खुद कहते हैं, "अभिनय के लिए अब मुंबई ही इकलौता ठिकाना नहीं है। फिल्में अब जहां-जहां शूट होने जा रही हैं, हम वहीं के कलाकार चुनने शुरू कर चुके हैं।"
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जहां शूटिंग, वहीं के कलाकार, की ये नई समस्या जयशंकर त्रिपाठी जैसे कलाकार रोज भुगत रहे हैं। जयशंकर कहते हैं, “हमारे जैसे लाखों कलाकारों ने अपना पूरा जीवन मुंबई में अपनी गृहस्थी सजाने में खर्च कर दिया। अब जाकर हालात कुछ ऐसे बने हैं कि हम अपने बच्चों की अच्छी पढ़ाई और अच्छी शादी की बात सोच सकते हैं कि अब फिल्म निर्माता हमें बाहर शूटिंग पर ले ही नहीं जाते। उन्हें वहीं के कलाकार ढूंढ कर दिए जा रहे हैं। इनके न आने-जाने के किराये पर खर्च होता है और न वहां रहने पर। खाना भी ये घर से ही खाकर आ जाते हैं।”
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हिंदी फिल्म व टीवी कलाकारों की सबसे बड़ी संस्था सिने एंड टीवी आर्टिस्ट एसोसिएशन (सिन्टा) की महासचिव अभिनेत्री उपासना सिंह को भी इस समस्या की जानकारी है। वह बताती हैं, “सहायक कलाकारों को महीना पूरा होने के हफ्ते भर के भीतर ही भुगतान हो जाए इसके लिए हम लगातार प्रयासरत हैं। बीते साल महाराष्ट्र सरकार ने इस बारे में एक संकल्प पत्र जारी किया था लेकिन उसमें कामगारों के महीना खत्म होने के हफ्ते भर भीतर भुगतान की बात कही गई है। कलाकारों के भुगतान का इसमें जिक्र ही नहीं है। हम जल्द ही इसे लेकर निर्माताओं की संस्थाओं से संवाद शुरू करने की कोशिश करने जा रहे हैं। कलाकारों को वैसे ही काम कम मिलता है और जिन्हें मिलता है, उनको पैसा समय से न मिलने से बहुत दिक्कतें हो रही हैं।”
जिस संकल्प पत्र की उपासना सिंह बात कर रही हैं, उसे फिल्म और टीवी निर्देशकों की संस्था इफ्टडा ने बुधवार को एक बार फिर अपने सारे सदस्यों के बीच वितरित किया है। इस संकल्प पत्र में साफ लिखा है कि मानदेय (ऑनरेरियम) पर काम करने वाले सभी लोगों का भुगतान महीने खत्म होने के अगले सात दिन के सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी निर्माता की होगी। इसी संकल्प पत्र में ये भी साफ किया गया है कि महाराष्ट्र राज्य में किसी फिल्म या टीवी सीरियल में काम करने के लिए किसी तरह की किसी यूनियन के परिचय पत्र या सदस्यता की आवश्यकता नहीं है।