अभिनेता रघु राम टीवी जगत की मशहूर हस्ती हैं। उन्हें एमटीवी के शो रोडीज से काफी शोहरत मिली थी। फिलहाल वह अमेजन मिनी टीवी के नए वेब सीरीज 'जमनापार' को लेकर व्यस्त चल रहे हैं। यह सीरीज पिता-पुत्र की जोड़ी पर आधारित है, जिनका जिंदगी को लेकर नजरिया एक दूसरे से काफी अलग है। दोनों की ख्वाहिशें अलग-अलग हैं, जिनमें से एक अपने पंख फैलाकर बेहतर जीवन की तरफ उड़ान भरना चाहता है।
गंजेपन से कम हो गया था मनोबल
रघु अपनी आगामी सीरीज की प्रमोशन के सिलसिले में बातचीत कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने बताया कि उनके पिता एक चार्टर्ड अकाउंटेंट थे, लेकिन दिल से वह एक कलाकार थे। रघु ने कहा, जब आपको तीन बच्चों का पालन-पोषण करना होता है, तो आपको व्यावहारिक होना पड़ता है। रघु के एक जुड़वा भाई भी हैं, जिन्हें राजीव के नाम से जाना जाता है। रघु ने आगे बताया कि उनकी परवरिश के दौरान उन्हें हमेशा खास महसूस कराया गया, लेकिन जब बाल पर बात आई, तो चीजें बदल गईं। उन्होंने कहा, जब मेंरे बाल झड़ना शुरु हुए, तो मुझे काफी दबाव, असुरक्षा, जटिलता महसूस होती थी। मैं टोपी पहना करता था। मैं हमेशा इस तथ्य को छिपाने की कोशिश करता था। इसलिए, उस वक्त मेरे लिए सिर मुंडवाना बहुत बड़ी बात थी।
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खुद को स्वीकारने से आया आत्मविश्वास
अपने आत्मविश्वास को लेकर उन्होंने कहा," हालांकि,जब मैंने एक खास तरह का दिखने की कोशिश करना बंद कर दिया, तो मेरे अंदर आत्मविश्वास की लहर दौड़ गई, जिससे आज हर कोई प्रभावित होता है। यह मेरे साथ हुए सबसे अच्छी चीजों में से एक निकला। इस वजह से मुझे एक अलग तरह की पहचान और एक ऐसा रूप मिला, जिससे बाद में मेरी बहुत मदद हुई। मुझे आत्मविश्वास तब आया, जब मैं जैसा हूं वैसे ही खुद को स्वीकार किया और इसे अपनाया"।
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'ऑडिशन देना भी है एक नौकरी'
रघु 11 वर्षों तक रोडीज के साथ जुड़े रहे थे। साल 2014 में उन्होंने घोषणा कर बताया था कि अब आगे से वह इस शो का हिस्सा नहीं रहेंगे। इसके बाद उन्होंने कुछ वेब सीरीज और फिल्में की। मुंबई जैसे शहर में कोई कैसे यहां की चुनौतियों से निपट सकता है, इस पर जवाब देते हुए रघु ने कहा,"नौकरी ढूंढ़ना काफी मुश्किल होता है। एक अभिनेता के लिए ऑडिशन एक नौकरी की तरह होता है। लोगों को लगता है कि ऑडिशन देने से आपको नौकरी मिल जाएगी। नहीं, ऑडिशन देना ही आपके लिए नौकरी है। लगातार ऑडिशन करते रहिए, आप और बेहतर होते जाएंगे, आपका नाम चर्चा में आने लगेगा और फिर आपको काम मिलेगा। यह कोई संघर्ष नहीं है, जीवन है। यही काम है, मुझे इसमें आनंद आता है। अगर आपको अपने काम में आनंद नहीं आता, तो फिर कुछ और कीजिए"।
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