कहानी पुरानी, तड़का नया
कहानी पुरानी फिल्म वाली ही है, बस तड़का नया है। तड़का थोड़ा ज्यादा मसालेदार भी है। आमतौर पर सीधे ओटीटी पर रिलीज होने वाली फिल्मों में इतना विशाल एक्शन देखने को मिलता नहीं है लेकिन जैसा कि मैंने पहले ही कहा कि ये फिल्म बड़े परदे के लिए बनी है। कहानी इस बार मिसूरी से फ्लोरिडा कीज आ चुकी है। एक नया रोडहाउस है। नाम भी इसका रोड हाउस ही है। एंथनी बागारोजी ने चार्ल्स मोनडरी, जिन्होंने पिछली फिल्म में मूल लेखक डेविड ली हेनरी के साथ काम किया था, के साथ मिलकर नई फिल्म की पटकथा लिखी है। काफी कुछ नया ड्रामा इस बार फिल्म में जोड़ा गया। एलवुड डाल्टन यहां भी है। थोड़ा रूखा और थोड़ा जिंदगी के फलसफे को अलग नजरिये से समझाते रहने वाला। अल्टीमेट फाइट चैंपियनशिप के एक मुकाबले में हुए हादसे के बाद वह खुद से भाग रहा है। रेलवे क्रॉसिंग पर रफ्तार से आती ट्रेन के सामने कार खड़ी करके आत्महत्या भी करना चाहता है लेकिन जिंदगी का मकसद उसे ऐन मौके पर समझ आ जाता है।
अपने लिए जीये तो क्या जिए..
दुनिया भर में अपनी फाइट्स के लिए मशहूर रहा एलवुड डाल्टन जब एक छोटे से कस्बे में एक अश्वेत युवती द्वारा संचालित बार को गुंडों से बचाने के लिए पहुंचता है, तो उसकी शोहरत या कहें कि बदनामी उससे पहले वहां पहुंच चुकी होती है। फिल्म की नायिका एली जो कि नर्स है, एक लाइन में पूरा बैकग्राउंड बयां कर भी देती है कि तुम क्या समझते हो, यहां लोगों के पास इंटरनेट नहीं है। एली और डाल्टन की प्रेम कहानी अजीब हालात में शुरू होती है। वह उसके घावों पर मरहम और टांके दोनों लगाना चाहती है। उसे अपने दर्द से मोहब्बत हो चुकी है और दर्द को ही अपना नशा समझ लेने वाले इंसान के सामने तो कायनात भी अक्सर हार जाती है। कुछ कुछ ऐसा ही यहां भी है। रोडहाउस पर गुंडों के बार बार होने वाले हमलों को राज कहानी में धीरे धीरे खुलता है। एक बच्ची और उसके पिता द्वारा संचालित बुक स्टोरी की क्षेपक कथा भी कहानी की हमसफर होती है। जब सब डाल्टन को ये कस्बा छोड़ देने के लिए कहते हैं, और वह इसके लिए तैयार भी हो जाता है तो इसी बच्ची की कहानी उसे रोक लेती है। डाल्टन का तो फलसफा ही रहा है, ‘अपने लिए जीये तो क्या जीये, तू जी ऐ दिल जमाने के लिए।’
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काबिले तारीफ मजबूत स्त्री किरदार
फिल्म ‘रोड हाउस’ दो वजहों से देखने लायक है। एक डाल्टन और एली की अलबेली सी प्रेम कहानी के लिए। जिसमें समंदर के बीच एक उथले स्थल पर पहुंचने के बाद डाल्टन को समझ आता है कि एली वहां उसे किसलिए लाई है। दोनों की प्रेम कहानी की बुनावट फिल्म का रूमानी पहलू है। फिल्म में बुकस्टोर वाली बच्ची और डाल्टन का रिश्ता भी बहुत संवेदनशील तरीके से पकता रहता है और डाल्टन को रोड हाउस आने का न्योता देने वाली फ्रेंकी भी कहानी का उत्प्रेरक बीच में बनती रहती है। ये तीनों स्त्री चरित्र बहुत कुशलता से लिखे गए हैं। और, बिना किसी उपदेश के महिला सशक्तिकरण की अंतर्धारा फिल्म में बहाते रहते हैं। तीनों कामकाजी हैं। फिल्म देखने की दूसरी वजह यही है कि तीनों को अपने पैरों पर खड़े दिखाकर फिल्म के लेखकों ने एक संदेश देने की कोशिश की है। हर समाज में स्त्री शक्ति का असली पोषण यही है कि उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने की मोहलत और ताकत दोनों दी जाए। एली के किरदार में डैनियेला मेलचियर ने नोटिस करने लायक काम किया है। जितनी वह दिखने में खूबसूरत हैं, उनके किरदार को संवाद भी उतने ही मजबूत मिले हैं। जेसिका विलियम्स ने फ्रेंकी के किरदार में अच्छा काम किया है और बेसबॉल बैट लेकर बुक स्टोर चलाने वाली किशोरी के किरदार में हाना लव लेनियर मजबूत बचपन के पोषण की जरूरत समझाती चलती हैं।
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जलवा जैक जिलेनहाल का
साथी कलाकारों की मेहनत से मजबूती पाती फिल्म ‘रोड हाउस’ का असल आकर्षण इसके हीरो जेक जिलेनहाल हैं। ‘स्पाइडरमैन फार फ्रॉम होम’ में विलेन मिस्टीरियो बनने के बाद से उन्हें गैरअंग्रेजी भाषी दर्शक भी खूब पहचानने लगे हैं। उनके शरीर सौष्ठव का भी अपना एक दैहिक आकर्षण है और शर्ट उतारने के बाद उनकी देहयष्टि ऋतिक रोशन की याद आपको दिला सकती है। रिंग में लड़ाई के दृश्यों से लेकर खतरनाक द्वंद्व वाले दृश्यों में भी जेक ने अपना भावनात्मक अभिनय बरकरार रखा है। उनके अभिनय का असल आकर्षण फिल्म में उस वक्त प्रकट होता है जब वह कहानी के तीनों मुख्य महिला किरदारों से संवाद करते हैं। इस दौरान उनकी आंखों की चमक हर बार अलग होती है। एली के सामने भी वह ऐसे ही सहज रहते हैं जैसे आकर्षण में होने के बाद भी एक पुरुष को निजी जीवन में होना चाहिए। ये कुछ कुछ ऐसा ही है जैसे बगीचे में लगा गुलाब पसंद आने पर भी उसे तोड़ना नहीं, बल्कि उसकी ताजगी बनाए रखने का जतन करते रहना है।
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कोनोर का धमाकेदार डेब्यू
अल्टीमेट फाइटिंग चैंपियनशिप में फेदरवेट और मिडिलवेट सेक्शन दोनों के इकलौते चैंपियन रहे कोनोर मैकग्रेगर की बतौर अभिनेता ये पहली फिल्म है। सात साल पहले अपने ऊपर बनी डॉक्यूमेंट्री में दिखने के बाद फिल्म ‘रोड हाउस’ में नॉक्स के रूप में उनकी एंट्री पहले सीन से ही दहशत का माहौल बनाए रखने में आखिर तक कामयाब रहती है। कई दृश्यों में तो वह फिल्म के हीरो जेक जिलेनहाल पर भी भारी पड़ते दिखते हैं। एक्शन उनकी शान है। और, अभिनय में भी अगर थोड़ी जान वह आगे डालते रहे तो हॉलीवुड फिल्मों को एक जोरदार विलेन उनमें मिल सकता है। फिल्म का संगीत इसका कमजोर पहलू है और ये इसके बावजूद कि रोड हाउस में लोहे की जाली के पीछे एक बैंड हर माहौल में संगीत बजाता रहता है। एली और डाल्टन की समंदर यात्रा के दौरान एक अच्छा रोमांटिक गीत फिल्म की रेटिंग बढ़ा सकता था। फिल्म की सिनेमैटोग्राफी और संपादन देखने लायक है।
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