देसी ओटीटी जियो सिनेमा के संचालकों को समझ नहीं आ रहा कि इतना सारा थोक के भाव जो कॉन्टेन्ट उन्होंने हर दूसरे, तीसरे निर्माता से बनवा लिया है, उसे अब खपाएं कैसे। सो, ओटीटी का नया प्रयोग है, वेब सीरीज ‘लखन लीला भार्गव’। ये नाम है एक वकील का जिसे उसके दोस्त एलएलबी भी कहकर बुलाते हैं। सोमवार के दिन पहला एपिसोड आया है। दूसरा और तीसरा आएगा मंगल और बुध को। फिर अगले सात हफ्ते तक हफ्ता शुरू होते ही ये कर्म चलने वाला है। वीकएंड धारावाहिकों की जगह वीक बिगनिंग धारावाहिक लाया है जियो सिनेमा। पहला एपिसोड प्रसारित हो चुका है और जैसे बोरे में परखी डालकर अनाज परखा जाता है, वैसे इस एपिसोड से अगर सीरीज परखनी हो तो मामला बहुत मुश्किल दिख रहा है।
इस सीरीज में रवि दुबे की एंट्री भी अजीबो गरीब दिखाई गई है। कोर्ट परिसर में जब भार्गव की एंट्री 'न्याय के रक्षक, अन्याय के भक्षक, वकालत के हेडमास्टर, कृष्ण के लिए बलराम, कंस के लिए कृष्ण, चेहरे पर रखते हैं मुस्कान, कानून के लिए नमन, जो भी करता है, वन टू का फोर, फोर टू का वन, उसके लिए एलएलबी और मित्रो के लिए माय नेम इज लखन' जैसे डायलॉग के साथ होती है, तो 'राम लखन' के अनिल कपूर याद आ जाते हैं। उसके दोस्त किसी तरह से पहला केस दिलवाते भी हैं. तो यह कहकर मना कर देता है कि आड़े टेढ़े केस मत दिलवाया करो, क्योंकि कानून सेकेंडरी और न्याय प्राइमरी है।
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लखन लीला भार्गव की मां को फिल्मों में काम करने का बहुत बड़ा शौक है। उसका अपना सपना है फिल्मों में जूनियर आर्टिस्ट बनाना। लेकिन, उसका सपना तभी पूरा होगा तब उसका बेटा बड़ा वकील बनेगा और उसकी बायोपिक बनेगी। इसलिए वह अपने बेटे को बार बार धमकी देती है कि अगर वह कामयाब वकील नहीं बनेगा तो आत्महत्या कर लेगी। किसी तरह से लखन लीला भार्गव के दोस्त, प्रीति आचार्य का केस दिलवाते है। खुशी से केस लड़ने के लिए लखन अपने घर से निकलता है और कोर्ट रूम में पहुंचने के बाद पता चलता है कि प्रीति आचार्य ने नीरज शांडिल्य को अपना वकील रख लिया। एक बार फिर लखन को निराशा हाथ लगती है। और, डेली सोप की तरह पहला एपिसोड एक टर्न और ट्विस्ट के साथ खत्म होता है।
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