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Insidious The Red Door Review: लाल दरवाजे का रहस्य और जानी पहचानी प्रेतकथा, पैट्रिक के निर्देशन का इम्तिहान

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इनसिडियस द रेड डोर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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Movie Review
इनसिडियस द रेड डोर
कलाकार
पैट्रिक विल्सन , टाई सिमकिन्स , रोस बर्न , एड्र्यू एस्टर , लिन शाये और डेनियल सिनक्लेयर आदि
लेखक
ली वैनेल और स्कॉट टीम्स
निर्देशक
पैट्रिक विल्सन
निर्माता
जैसन ब्लम और ऑरेन पेली आदि
रिलीज
6 जुलाई 2023
रेटिंग
2/5
लीक से हटकर लिखी गई किसी कहानी को दर्शकों से मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया इस पर फिल्म बनाने वालों को न सिर्फ उत्साहित करती है, बल्कि कहानी को आगे बढ़ाने और इस पर सीक्वल फिल्में बनाने के लिए भी प्रेरित करती है। साल 2010 में रिलीज हुई फिल्म ‘इनसिडियस’ के साथ ऐसा ही हुआ। लोग जब हॉरर फिल्मों में इंसानी शरीरों की दुर्गति,  अनावश्यक अंग प्रदर्शन और उबाऊ दैहिक संबंधों को देख देखकर थक चुके थे तो इस फिल्म ने डरावनी फिल्मों की एक नई दिशा तय की। इस फिल्म में कहानी के वातावरण ने लोगों को इतना डराया कि इसके निर्माताओं ने इस कहानी को आगे बढ़ाते हुए अब तक चार फिल्में बना डालीं। इस फ्रेंचाइजी की पिछली फिल्म ‘इनसिडियस: द लास्ट की’ पांच साल पहले रिलीज हुई थी। फिल्म ‘इनसिडियस: द रेड डोर’ इनमें से शुरू की दो फिल्मों के बाद की कहानी है यानी कि कहानी के प्रवाह के अनुसार इसे इस फ्रेंचाइजी की तीसरी फिल्म माना जा सकता है।
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इनसिडियस द रेड डोर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
बेचैन प्रेतात्मों की कहानी
‘इसिडियस’ फ्रेंचाइजी हॉलीवुड हॉरर फिल्मों की अब तक की सबसे सफल फ्रेंचाइजी में गिनी जाती है। इसकी पहली फिल्म ने भारत में भी खूब हलचल मचाई थी और इसीलिए हर बार जब भी इस श्रृंखला में कोई नई कड़ी जुड़ती है, इसका इंतजार भारतीय दर्शकों को भी खूब रहता है। फिल्म ‘इनसिडियस: द रेड डोर’ अमेरिका से एक दिन पहले भारत में रिलीज हुई और इसका शुरुआती लाभ भी हो सकता है फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर मिले। इस फिल्म से निर्देशन की शुरुआत कर रहे अभिनेता पैट्रिक विल्सन की ये फिल्म इस फ्रेंचाइजी को एक अपेक्षित विराम तक लाने की कोशिश करती है। कहानी उसी लैम्बर्ट परिवार की है जिसमें अपना शरीर छोड़ सिर्फ आत्मा के सहारे दूसरी दुनिया में चले जाने की कला विरासत में रही है। अगर इस फ्रेंचाइजी की पहली फिल्म आपको याद हो तो उसमें डाल्टन ऐसी ही कोशिश करता है और फंस जाता है उस दुनिया में जहां रहने वाले जीवित शरीरों की आत्माओं के सहारे धरती पर लौटने को बेचैन हैं। कहानी उससे अब दशक भर आगे आ चुकी है। जॉश अपने बड़े हो चुके बेटे डाल्टन को उसके कॉलेज छोड़ने जाता है। अपनी याददाश्त को ठीक करने की कोशिशों में भी वह लगा रहता है। लेकिन, अतीत उसका पीछा नहीं छोड़ता।
 

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इनसिडियस द रेड डोर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
विरासत में मिला अतीत का खौफ
उधर, डाल्टन को हॉस्टल में जो कमरा मिला है, उसकी साझीदार के तौर पर एक लड़की आ जाती है। दोनों को समझ आता है कि ये नाम को लेकर हुआ भ्रम है। इसी बीच दोनों के बीच दोस्ती होती है। क्लासरूम में डाल्टन की शिक्षक कैनवस पर जो कुछ उतारने को कहती है, वह डाल्टन के लिए एक ऐसा दरवाजा खोल देती है जिसके जरिये दूसरी दुनिया की ताकतों का प्रवेश फिर से डाल्टन की जिंदगी में होने लगता है। जॉश इस बीच अपने माता पिता का अतीत तलाशता है। उसे अपने पिता की मौत का सच पता चलता है। अलग हो चुकी पत्नी से वह मिलने जाता है तो यह सच भी सामने आता है कि उसे तो ये सब कुछ पहले से मालूम है। मायावी ताकतों से अब पिता पुत्र की सामूहिक भिड़ंत है। पिछली फिल्मों के संदर्भों के साथ कहानी वहां तक पहुंच जाती है जहां मामला आर या पार का हो जाता है।
 

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इनसिडियस द रेड डोर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
ढीली पटकथा ने किया निराश
फिल्म ‘इनसिडियस: द रेड डोर’ में इसके लेखकों और निर्देशक की सबसे बड़ी चुनौती यही रही कि वे दर्शकों को ऐसा क्या परोसें, जो उन्होंने पहले कभी नही देखा हो। इस कथा श्रृंखला को लगातार देखते आ रहे दर्शकों को डराने के लिए टीम को ऐसा कुछ करना चाहिए था जो कल्पनातीत हो लेकिन इस पूरी फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी यही है कि ये एक बार भी सिनेमाहाल के अंधेरे में बैठे दर्शक को सिहरा नहीं पाती है। पॉपकॉर्न खाती युवतियां भी एक बार भी डर के मारे चीखती नहीं है। सब राजी खुशी संपन्न हो जाता है और लोगों के चेहरे देखकर लगता ही नहीं कि वे कोई हॉरर फिल्म देखकर निकले हैं। इसमें सबसे बड़ी कमी रही फिल्म की पटकथा लिखने वाली टीम की। पिता पुत्र के आपसी तनाव से शुरू होने वाली फिल्म में जैसे ही ये दोनों किरदार अलग अलग माहौल में रहने लगते हैं, फिल्म का असल तनाव बिंदु खत्म हो जाता है।
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इनसिडियस द रेड डोर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे पैट्रिक विल्सन
बड़े डाल्टन के रूप में टाई सिमकिन्स पर इस फिल्म का पूरा दारोमदार है लेकिन इस तरह के किरदारों के लिए उनका अभिनय कौशल पर्याप्त नहीं है। एक मासूम से छात्र के रूप में तो वह प्रभावित करते हैं लेकिन पिता से नाराज बेटे और अपनी ही बनाई तस्वीरों के रहस्य से अनजान एक कलाकार के रूप में उनका अभिनय कौशल उम्मीद के मुताबिक नहीं है। जॉश लैम्बर्ट के रूप में पैट्रिक ने भी कुछ खास ऐसा नहीं किया जो दर्शकों पर असर डाल सके। हां, हॉस्टल में डाल्टन की दोस्त बनी डेनियल सिनक्लेयर जरूर अपनी तरफ दर्शकों का ध्यान खींचती हैं। उनके संवाद भी काफी मजाकिया अंदाज में लिखे गए हैं जिन्होंने उनकी अदायगी उतनी ही सहजता से की है। फिल्म ‘इनसिडियस: द रेड डोर’ में इस सीरीज के संगीतकार रहे जोसेफ बिशारा की वापसी भी हुई है लेकिन, उनका संगीत भी निराश ही करता है। ओटीटी पर इस हफ्ते एक देसी हॉरर कहानी ‘अधूरा’ भी रिलीज हो रही है। दोनों के बीच मुकाबले में फिल्म ‘इनसिडियस: द रेड डोर’ कमजोर पड़ती दिख रही है।


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