बेचैन प्रेतात्मों की कहानी
‘इसिडियस’ फ्रेंचाइजी हॉलीवुड हॉरर फिल्मों की अब तक की सबसे सफल फ्रेंचाइजी में गिनी जाती है। इसकी पहली फिल्म ने भारत में भी खूब हलचल मचाई थी और इसीलिए हर बार जब भी इस श्रृंखला में कोई नई कड़ी जुड़ती है, इसका इंतजार भारतीय दर्शकों को भी खूब रहता है। फिल्म ‘इनसिडियस: द रेड डोर’ अमेरिका से एक दिन पहले भारत में रिलीज हुई और इसका शुरुआती लाभ भी हो सकता है फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर मिले। इस फिल्म से निर्देशन की शुरुआत कर रहे अभिनेता पैट्रिक विल्सन की ये फिल्म इस फ्रेंचाइजी को एक अपेक्षित विराम तक लाने की कोशिश करती है। कहानी उसी लैम्बर्ट परिवार की है जिसमें अपना शरीर छोड़ सिर्फ आत्मा के सहारे दूसरी दुनिया में चले जाने की कला विरासत में रही है। अगर इस फ्रेंचाइजी की पहली फिल्म आपको याद हो तो उसमें डाल्टन ऐसी ही कोशिश करता है और फंस जाता है उस दुनिया में जहां रहने वाले जीवित शरीरों की आत्माओं के सहारे धरती पर लौटने को बेचैन हैं। कहानी उससे अब दशक भर आगे आ चुकी है। जॉश अपने बड़े हो चुके बेटे डाल्टन को उसके कॉलेज छोड़ने जाता है। अपनी याददाश्त को ठीक करने की कोशिशों में भी वह लगा रहता है। लेकिन, अतीत उसका पीछा नहीं छोड़ता।
विरासत में मिला अतीत का खौफ
उधर, डाल्टन को हॉस्टल में जो कमरा मिला है, उसकी साझीदार के तौर पर एक लड़की आ जाती है। दोनों को समझ आता है कि ये नाम को लेकर हुआ भ्रम है। इसी बीच दोनों के बीच दोस्ती होती है। क्लासरूम में डाल्टन की शिक्षक कैनवस पर जो कुछ उतारने को कहती है, वह डाल्टन के लिए एक ऐसा दरवाजा खोल देती है जिसके जरिये दूसरी दुनिया की ताकतों का प्रवेश फिर से डाल्टन की जिंदगी में होने लगता है। जॉश इस बीच अपने माता पिता का अतीत तलाशता है। उसे अपने पिता की मौत का सच पता चलता है। अलग हो चुकी पत्नी से वह मिलने जाता है तो यह सच भी सामने आता है कि उसे तो ये सब कुछ पहले से मालूम है। मायावी ताकतों से अब पिता पुत्र की सामूहिक भिड़ंत है। पिछली फिल्मों के संदर्भों के साथ कहानी वहां तक पहुंच जाती है जहां मामला आर या पार का हो जाता है।
उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे पैट्रिक विल्सन
बड़े डाल्टन के रूप में टाई सिमकिन्स पर इस फिल्म का पूरा दारोमदार है लेकिन इस तरह के किरदारों के लिए उनका अभिनय कौशल पर्याप्त नहीं है। एक मासूम से छात्र के रूप में तो वह प्रभावित करते हैं लेकिन पिता से नाराज बेटे और अपनी ही बनाई तस्वीरों के रहस्य से अनजान एक कलाकार के रूप में उनका अभिनय कौशल उम्मीद के मुताबिक नहीं है। जॉश लैम्बर्ट के रूप में पैट्रिक ने भी कुछ खास ऐसा नहीं किया जो दर्शकों पर असर डाल सके। हां, हॉस्टल में डाल्टन की दोस्त बनी डेनियल सिनक्लेयर जरूर अपनी तरफ दर्शकों का ध्यान खींचती हैं। उनके संवाद भी काफी मजाकिया अंदाज में लिखे गए हैं जिन्होंने उनकी अदायगी उतनी ही सहजता से की है। फिल्म ‘इनसिडियस: द रेड डोर’ में इस सीरीज के संगीतकार रहे जोसेफ बिशारा की वापसी भी हुई है लेकिन, उनका संगीत भी निराश ही करता है। ओटीटी पर इस हफ्ते एक देसी हॉरर कहानी ‘अधूरा’ भी रिलीज हो रही है। दोनों के बीच मुकाबले में फिल्म ‘इनसिडियस: द रेड डोर’ कमजोर पड़ती दिख रही है।