फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Charlie Chopra Review: अगाथा क्रिस्टी बनी देसी चार्ली चोपड़ा, पहले एपिसोड में वामिका, चंदन और गुलशन महके

विज्ञापन
चार्ली चोपड़ा रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
विज्ञापन
Movie Review
चार्ली चोपड़ा
कलाकार
वामिका गब्बी , प्रियांशु पैन्युली , नसीरुद्दीन शाह , नीना गुप्ता , रत्ना पाठक शाह , गुलशन ग्रोवर , चंदन रॉय सान्याल , इमादुद्दीन शाह और विवान शाह आदि
लेखक
विशाल भारद्वाज , ज्योत्सना हरिहरन और अंजुम रजबअली (अगाथा क्रिस्टी के उपन्यास पर आधारित)
निर्देशक
विशाल भारद्वाज
निर्माता
प्रीति साहनी और विशाल भारद्वाज
ओटीटी:
सोनी लिव
रेटिंग
3/5

शेक्सपीयर के लिखे नाटकों पर ‘मकबूल’, ‘ओंकारा’ और ‘हैदर’ जैसी चर्चित फिल्में बनाने के बाद निर्माता-निर्देशक विशाल भारद्वाज का कैमरा अब अगाथा क्रिस्टी के उपन्यासों की तरफ घूमा है। सोनी लिव के लिए बनाई उनकी सीरीज ‘चार्ली चोपड़ा’ अगाथा के उपन्यास ‘द सिटाफोर्ड मिस्ट्री’ पर आधारित है। अगाथा क्रिस्टी की कंपनी भी सीरीज की निर्माताओं में शामिल है और विशाल के बेटे आसमान भी अपनी मां रेखा के साथ सीरीज के सह निर्माता हैं। सीरीज का नाम हाल के दिनों तक ‘चार्ली चोपड़ा एंड द मिस्ट्री ऑफ सोलांग वैली’ के रूप में ही चर्चा में रहा लेकिन सोनी लिव पर इसका पहला एपिसोड सिर्फ ‘चार्ली चोपड़ा’ के नाम से ही रिलीज हुआ है। पहले एपिसोड में ही दर्जन भर के करीब नामी गिरामी चेहरे हैं। एक मर्डर है और इसके शक में जो शख्स फंसा है, उसकी मंगेतर है, चार्ली चोपड़ा।

विज्ञापन

चार्ली चोपड़ा रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
पटियाला वाली चार्ली
चार्ली चोपड़ा पटियाला की रहने वाली है। जासूसी उसको विरासत में मिली है। इन दिनों चंडीगढ़ में रह रही चार्ली फिलहाल हिमाचल प्रदेश में है। कहानी जादू टोना के जरिये माहौल बनाने से शुरू होती है जिसके आखिर में आई आत्मा एक ब्रिगेडियर की मौत की तरफ इशारा करती है। परिवार के लोग उनसे संपर्क करने की कोशिश करते हैं लेकिन तूफानी रात में कुछ तो गड़बड़ है। मामला समझने के लिए ब्रिगेडियर के रिसॉर्ट की देखरेख करने वाले रिटायर्ड कर्नल ही पैदल ही निकल पड़ते हैं। हत्या हो चुकी है। होटल की एक चाभी मौके पर है। साथ ही शहद की एक टूटी शीशी भी। मामला पुलिस तक पहुंचता है। लेकिन, घरवालों को जल्दी है ब्रिगेडियर के वसीयतनामे में। वसीयतनामा पढ़ा जाता है। और, इसके पहले कि लोग हिसाब लगा पाएं कि किसको क्या मिला, प्रकट हो जाती है ब्रिगेडियर को अपना ‘बेबी’ कहने वाली एक मोहतरमा। वह पेट से हैं और बच्चा वह ब्रिगेडियर का बताती हैं।

चार्ली चोपड़ा रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
शादी में चुराए जूतों की खोज
सोनी लिव ने अपनी इस वेब सीरीज के स्क्रीनर समीक्षकों को नहीं भेजे हैं। शायद डरे हुए हों कि पता नहीं एक विदेशी कहानी का देसी रूपांतरण लोगों को पसंद आएगा भी नहीं। ओटीटी पर भी अभी एक ही एपिसोड रिलीज हुआ है। सिर्फ ओटीटी के ग्राहकों के लिए है। लालच यह दिया जा रहा है कि इसे देख कर दर्शक सीरीज का शीर्षक भी सुझा सकते हैं। मार्केटिंग का अच्छा टोटका है लेकिन सीरीज कहानियों के दम पर चलती हैं, टोटकों के दम पर नहीं, ये बात सोनी लिव को समझनी अब भी बाकी है। खैर, ‘चार्ली चोपड़ा’ की तरफ लौटते हैं। वह ऐसी जासूस है जो मोजे की बदबू सूंघकर बता देती है कि सालियों ने शादी में जूते कहां छुपाए हैं। माफ कीजिएगा, लेकिन सीरीज के लेखकों को साल 2023 में एक महिला पेशेवर को परिचय कराने का इससे बढ़िया दूसरा कोई तरीका नहीं सूझा।

चार्ली चोपड़ा रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
कहानी साधने में सफल रहे विशाल
चार्ली चोपड़ा यहां वामिका गब्बी हैं। उनके जिम्मे ही दर्शकों से बातें करते हुए किरदारों का परिचय कराने की भी जिम्मेदारी है। जीजा की झप्पी से उसे खासी चिढ़ है। हां, थाने से सुरक्षित निकल पाने के लिए एक अनजान नौजवान के साथ में उसे दिक्कत नहीं है। उससे बातें भी वह खुलकर करती है, बिना यह जाने कि वह तो उसका स्टिंग ऑपरेशन जैसा कुछ रिकॉर्ड कर रहा है। वेब सीरीज ‘चार्ली चोपड़ा’ का पहला एपिसोड देखा जाए तो कहानी का सूत्र साधने और कलाकारों का परिचय कराने भर की कोशिश कर पाता है। पहाड़ हों, बर्फ हों, नीला फिल्टर लगाए रात हो, टॉर्च की रोशनी हो और सांय सांय करती हवाओं के बीच एक आत्मा का भी जिक्र आ जाए तो माहौल अपने आप डरावना बन ही जाता है। विशाल भारद्वाज भी सीरीज के पहले एपिसोड में माहौल ही बनाते दिखे। और, इसमें सफल भी रहे।

चार्ली चोपड़ा रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
सबका साथ, सबका विकास
सस्पेंस भरी सीरीज में कहानी और पटकथा के साथ साथ संगीत का भी साथ बढ़िया रहे तो माहौल और सही जमता है। यहां मूल संगीत की जिम्मेदारी विशाल ने खुद संभाली है। संगत बिठाने में भी वह उस्ताद रहे हैं। साथ के लेखक अंजुम रजबअली को उन्होंने हाई कोर्ट का वकील बनाकर कैमरे के सामने पेश कर दिया है। निर्देशक विनय शुक्ला भी पहले एपिसोड में वसीयतनामा पढ़ते नजर आते हैं। समाजवाद इसी को कहते हैं। सबका साथ, सबका विकास। लारा दत्ता का अभी कहानी में आना बाकी है।
विज्ञापन

चार्ली चोपड़ा रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
सीरीज अभी बाकी है
गुलशन ग्रोवर ने पहले ही एपिसोड में अपना रंग दिखाया है। नीना गुप्ता तो खैर अब हर दूसरी फिल्म और तीसरी सीरीज में दिख ही जाती है। उनको छोड़ें तो नसीर के अलावा शाह परिवार के बाकी तीन सदस्यों रत्ना, विवान और इमाद ने भी अच्छा काम किया है। प्रियांशु पैन्यूली की अदाकारी के पंख अभी खुलने शेष हैं। साली पर फिदा जीजा के किरदार में चंदन रॉय सान्याल के किरदार को लेकर दर्शकों में उत्सुकता बंधने लगी है। बाकी आगे देखते हैं, सीरीज अभी बाकी है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें