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Film Review : खा कर पछताने वाला लड्डू नहीं है 'रनिंग शादी'

Fri, 17 Feb 2017 03:21 PM IST
रवि बुले / अमर उजाला, मुंबई ब्यूरो
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'रनिंग शादी'
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निर्माताः रॉनी लाहिड़ी, शुजित सरकार
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निर्देशकः अमित रॉय
सितारेः अमित साध, तापसी पन्नू, अर्श बाजवा
रेटिंग *1/2

अगर आपकी शादी हो चुकी है तो इस फिल्म को देखने का कोई मतलब नहीं और अगर नहीं हुई है तब भी इसे देख कर कुछ नहीं मिलने वाला। यह खा कर पछताने वाला लड्डू नहीं है। इसे टाइम और पैसा खराब करने के लिए देखा जा सकता है। 'पिंक' के बाद 'रनिंग शादी' में तापसी पन्नू को देख कर निराशा होती है। अमित साध ने न तो पहले उम्मीदें जगाई थीं और न इस फिल्म से उनका भविष्य दिखता है। बॉलीवुड फिल्मकारों को लगता है कि हिंदी फिल्मों का दर्शक बेगानी शादियों में अब्दुल्ला दीवाना बन जाता है। शादी का विषय होने मात्र से फिल्म कामयाब होने की गारंटी बढ़ जाती है।

बिहारी लड़का और पंजाबी लड़की की है लव स्टोरी

तापसी पन्नू और अमित साध
'रनिंग शादी' में दो लड़कों, भरोसे (अमित साध) और साइबर (अर्श बाजवा) को आइडिया आता है क्यों न ऐसी वेबसाइट बनाएं जिसमें भाग कर शादी करने वाले लड़के-लड़कियों की मदद के लिए गाड़ी से लेकर पंडित और वकील तक सबका इंतजाम रहे। अमृतसर में रहते हुए वो ऐसा करते भी हैं लेकिन कहानी में यह बात कोई खासियत नहीं पैदा कर पाती। उधर, भरोसे दुल्हनों के कपड़ों की जिस दुकान में कभी काम करता था उसके मालिक की बेटी निम्मी (तापसी पन्नू) उसे दिल दे बैठती है। उसके संग भाग लेती है। भरोसे बिहारी लड़का है और निम्मी पंजाबी लड़की है।
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फिल्म का मूल आइडिया रोचक है

तापसी पन्नू और अमित साध
फिल्म का मूल आइडिया रोचक है मगर लेखक-निर्देशक जल्दी ही चूक जाते हैं। तापसी के किरदार की शुरुआती चमक देखते-देखते खत्म हो जाती है। निम्मी को विवाह पूर्व सेक्स में हिचक नहीं। वह कंडोम खुद खरीदती है लेकिन लेखक-निर्देशक इसे विस्तार नहीं देते। निम्मी बोर करने वाली साधारण हीरोइन में बदल जाती है। निम्मी के भरोसे के साथ भागने पर कहानी जरूर थोड़ी रफ्तार पकड़ती है। हालांकि तब तक दर्शक का धैर्य जवाब दे जाता है। संवाद-गीत-संगीत में कुछ विशेष नहीं है। फिल्म का अंत भी अंत जैसा नहीं होता। सब कुछ गुजर जाने के बाद सिर्फ गुबार बचा रहता है।
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