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Film Review : इतिहास और इमोशन का मिक्स है 'द गाजी अटैक'

Fri, 17 Feb 2017 03:21 PM IST
रवि बुले / अमर उजाला, मुंबई ब्यूरो
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'द गाजी अटैक'
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निर्माताः पीवीपी सिनेमाज / मैटनी एंटरटेनमेंट
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निर्देशकः संकल्प रेड्डी
सितारेः राणा डग्गुबाती, केके मेनन, अतुल कुलकर्णी, तापसी पन्नू, ओम पुरी
रेटिंग **1/2

हाल के वर्षों में देश का इतिहास चर्चा के नए विषय रूप में उभरा है। क्या इतिहास में हमारी गौरव गाथाओं से न्याय नहीं हुआ ? सोशल मीडिया में बहस हो रही है। गौरव को फिर से लिखने की कोशिशें भी दिखती हैं। जो दिखता है, वो बिकता है। अतः सिनेमा के पर्दे पर भी इतिहास मुख्यधारा में जगह पा रहा है। नए सिरे से रच रहे इतिहास में देशभक्ति के नए पैमाने भी बन रहे हैं। 'दंगल' में राष्ट्रगान एक बार बजा तो वहीं 'द गाजी अटैक' में दो बार बजा है। साथ ही कौमी तराना, सारे जहां से अच्छा भी आप इसमें देखेंगे और सुनेंगे। गहरे समंदर में ही पनडुब्बी हिलोरें पैदा नहीं करती, सिनेमाहॉल में भी आप तरंगों को महसूस कर सकते हैं।

फिल्म की कहानी साल 1971 की है

कहानी साल 1971 की है जब पाकिस्तान दो हिस्सों (पूर्वी और पश्चिमी) में बंटा था। पूरब में पश्चिम से अलग होने का संघर्ष था। बंद फाइलों में यह दर्ज बताया जाता है कि पाकिस्तानी हुक्मरानों ने पूर्वी हिस्से पर भारत का प्रभाव घटाने और अपनी पकड़ मजबूत बनाने के लिए अपनी सैन्य पनडुब्बी गाजी से विशाखापट्टनम पर हमले की योजना बनाई थी। वह भारत को युद्ध में उलझा कर पूर्वी हिस्से (जो बाद में बांग्लादेश बना) का जनविद्रोह क्रूरता से दबाना चाहता था। भारत के जांबाज जल-सैनिकों ने पाकिस्तानी की चाल भांप ली और हमलावर गाजी को समंदर में ही नेस्तानाबूत करके डुबो दिया।

निर्देशक संकल्प रेड्डी की फिल्म भारत के गुप्त मिशन को थोड़ी हकीकत और थोड़े फसाने के अंदाज में सामने लाती है। पाकिस्तान द्वारा पानी के रास्ते हमले की आशंका होने पर वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा आक्रामक अफसर रणविजय सिंह (केके मेनन) को पनडुब्बी एस 21 के साथ बंगाल की खाड़ी में सिर्फ नजर रखने भेजा जाता है। उसके समानांतर अफसर अर्जुन वर्मा (राणा डग्गुबाती) को भी भेजा गया है कि रणविजय आगे हो कर हमला न करे। पाकिस्तानी पनडुब्बी तेजी से हमले के इराद से बढ़ रही है। क्या किया जाए ? दोनों किरदारों के बीच रस्साकशी है। उनके काम करने के जुदा-जुदा ढंग हैं। कौन सही, कौन गलत?
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'द गाजी अटैक' इतिहास को लेकर भावुक बनाती है

राणा डग्गुबाती
अगर आप इतिहास, ऐतिहासिक कहानियों और युद्ध-फिल्मों में दिलचस्पी लेते हैं तो यह फिल्म रोमांचित करेगी। परंतु इसकी अपनी सीमाएं हैं। कथानक बेहद छोटा है। रोमांच के क्षण कम हैं। कई बातों और दृश्यों का दोहराव है। आप आसानी से समझ सकते हैं कि आगे क्या होगा। कुछ बातें और दृश्य तर्क की कसौटी पर खरे नहीं उतरते। भले ही केके मेनन और अतुल कुलकर्णी प्रभावित करते हैं परंतु राणा डग्गुबाती को सैनिक के बजाय हीरो बनाने का मोह निर्देशक नहीं छोड़ पाए। तापसी पन्नू की भूमिका सिर्फ हीरोइन के स्पेस को भरने के लिए है।

फिल्म को खूबसूरती से शूट किया गया है। इसे और दर्शनीय बनाने के लिए कंप्यूटर पर की गई कारीगरी भी बढ़िया है। 'द गाजी अटैक' आपको इतिहास को लेकर कुछ भावुक बनाती है क्योंकि कई बार तकनीकी वजहों से जांबाजों को उनका श्रेय नहीं मिलता। सत्ता की कुछ मजबूरियां भी होती हैं।
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