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अंतिम बार पढ़िए राजेश खन्ना की फिल्म की समीक्षा

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विदाई भले ही कितनी भी दुखदाई रहे मगर इसकी अच्छी बात यह है कि जिसे हम प्यार करते हैं, विदाई के बाद उसकी सुंदर छवियों और अच्छी यादों को संजो कर रखना चाहते हैं। उसकी कमजोरियों और जर्जर छवि को याद नहीं रखना चाहते। अगर आप राजेश खन्ना के प्रशंसक हैं, उन्हें प्यार करते हुए आपने उनकी सुंदर छवियों को संजो कर रखा है तो निश्चित रूप से उनकी आखिरी फिल्म रियासत देखना चाहेंगे।
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क्या दूर रहना चाहिए इस फिल्‍म से?

लेकिन आपको सलाह है कि इस फिल्म से दूर रहे क्योंकि यह न केवल बहुत निराश करेगी, बल्कि मन में कहीं टीस भी पैदा करेगी कि यह तो हमारा सितारा नहीं...!! यही कारण है कि राजेश खन्ना के परिजनों ने भी उनकी इस फिल्म से दूरी बना ली। निश्चित रूप से राजेश खन्ना को चाहने वाला कोई व्यक्ति इसे उनकी आखिरी फिल्म नहीं मानना चाहेगा। भले ही तथ्य कहें कि इस फिल्म की शूटिंग के बीच में ही राजेश खन्ना का देहांत हो गया था। मगर तथ्य हमेशा सत्य नहीं होते। आप पाएंगे कि फिल्म में वह ऐक्टर राजेश खन्ना कहीं है ही नहीं, जिसके लिए करोड़ों दिल धड़कते थे।

बीमार दिखे हैं राजेश

फिल्म में राजेश खन्ना बहुत बीमार दिखाई पड़ते हैं। अधिकतर दृश्यों वह सिर्फ सिगार फूंक कर धुआं उड़ाते दिखते हैं। लड़खड़ाती आवाज में कुछ संवाद बमुश्किल बोल पाते हैं। जिनकी डबिंग न हो पाने के कारण कई जगह जिन्हें ढंग से सुना तक नहीं जा सकता। कहने को वह फिल्म में डॉननुमा इंसान ‘साहब’ बने हैं। जिन्हें धोखे से मार दिया जाता है।
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कहानी भी है कमजोर

फिर साहब का बेटा (आर्यमन रामसे) हत्यारों से बदला लेता है। कहानी के स्तर पर भी फिल्म शून्य बराबर है। इस फिल्म को देखना ऐसा दुखद अनुभव है, मानो आप किसी गगनचुंबी भव्य महल के उजाड़ खंडहर को देख रहे हों। अगर यह राजेश खन्ना की सिनेमा के पर्दे से विदाई का दृश्य है तो उनके प्रशंसक इसे खारिज करते हैं क्योंकि उनके जैसा सुपर सितारा सदियों में पैदा होता है और फिर कभी मरता नहीं।
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