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आपको भी चाहिए सिगरेट पीने वाली पत्नी?

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नई पीढ़ी प्यार की पहचान और शादी के फेरों को लेकर वाकई कनफ्यूज है या सिनेमा ही बार-बार ऐसा दिखा रहा है? जवाब जो भी हो लेकिन इन दिनों फिल्मवालों का यह फेवरेट विषय है। शादी के इर्द-गिर्द बुनी जा रही फिल्मों में अक्सर जीवनसाथी के चुनाव और आजीवन वादा निभाने को लेकर हीरो-हीरोइन का असमंजस देखा जा सकता है।
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सपनों में जीने वाले इन हीरो-हीरोइनों की कहानियों के बीच अब निर्देशक अजय भूयन लेकर आए हैं, अमित साहनी की लिस्ट। यह लिस्ट क्या है? लिस्ट यह है कि अमित साहनी अपनी होने वाली पत्नी में क्या-क्या खूबियां चाहता है। जैसेः वह क्रिकेट और सचिन तेंदुलकर की फैन हो। सुंदर और कूल हो।

सिगरेट भी पीए लड़की

काम में परफेक्ट हो। सिगरेट पीते वक्त सेक्सी दिखती हो... वगैरह-वगैरह। पर्दे के अमित जैसे असल जिंदगी में कई हैं। लेकिन क्या किसी को आज तक लिस्ट बना कर दुल्हन मिली है, जो अमित साहनी को मिल जाएगी? पर सोचिए कि ढूंढने से क्या नहीं मिलता! कहते हैं कि ढूंढने से भगवान भी मिल जाता है! जिसने खोजा, उसने ही पाया। लेकिन कहते तो यह भी हैं कि जोड़ियां तो रब ही बनाता है! कुल मिला कर काफी कनफ्यूजन है। लिस्ट, भगवान और लड़कियों की खोज के बीच।

एक कूल बैंकर अमित साहनी (वीर दास), जो लाखों में सैलरी पाता है, महंगी कार में चलता है, हर डील में अपने बैंक का प्रॉफिट बढ़ा देता है उसे अपनी लिस्ट वाली लड़की की तलाश है। एक घंटे 50 मिनट की यह फिल्म अमित की लिस्टवाली लड़की की तलाश की यात्रा है। यूं अमित को लड़कियां तो कई मिलती हैं लेकिन लिस्ट वाली नहीं।

पसंद आ जाती है एक लड़की

आखिरकार होता यह है कि मां एक लड़की, माला (वेगा) से अमित की मुलाकात कराती है, जो उसकी लिस्टवाली जैसी कतई नहीं है लेकिन है खूबसूरत, खूब बोलने वाली, बंजी जंपिंग की शौकीन, घर को कचराघर बना कर रखने वाली। अमित समझ नहीं पाता कि धीरे-धीरे माला उसे क्यों पसंद आने लगी है?

सोचने समझने पर मालूम होता है कि अपोजिट अट्रेक्ट्स! कहानी में ट्विस्ट यह कि अमित जब लिस्ट से समझौता करके माला से सगाई कर लेता है तो अगले 48 घंटों में उसके सामने लिस्ट वाली लड़की आकर खड़ी होती है...!! अब क्या हो...?

यह फिल्म आम बॉलीवुड फिल्मों की लाइन पर नहीं है। हट कर है। अगर आप इस कॉमेडी को डेविड धवन या रोहित शेट्टी के अंदाज की समझ कर देखने जाएंगे तो बहुत निराश होंगे। यह फिल्म दिमाग घर पर रख कर देखने वाली नहीं है।
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आधुनिक जमाने की है फिल्म

फिल्म का आनंद उठाने के लिए आपको थोड़ा आधुनिक जमाने की फिल्म मेकिंग और स्टोरी टेलिंग का शौक रखना होगा। फिल्म की कहानी अमित साहनी की जुबानी है। कैसे वह लिस्ट के पीछे पड़ा है और कैसे उसे ऊपरवाला पाठ पढ़ाता है। फिल्म का निर्देशन अच्छा है। लेकिन इसकी कमजोरी वीर दास है।

वह स्टेंड-अप कॉमेडियन हैं और फिल्म में भी उसी अंदाज का अभिनय करते हैं। सिनेमा स्टेंड-अप कॉमेडी नहीं है। वहीं फिल्म की दोनों मुख्य नायिकाओं वेगा तमोतिया और अनिंदिता नायर ने अपना काम खूबसूरती से किया है। आगे आप तय करें कि आपकी लिस्ट में यह फिल्म बैठती है या नहीं।

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