डिजिटल रिव्यू: आजा पिया (गाना)
कलाकार: महक मारू (गायक), किशन पालीवाल (गीतकार), शान रहमान (संगीतकार)। वीडियो निर्देशक: श्रीतमा दत्ता
यूट्यूब चैनल: शेमारू फिल्मी गाने
बहुत बड़ा कलेजा चाहिए होता है आज के डिजिटल दौर में किसी गायक को, बिना किसी रिक्रिएशन, रीमिक्स या कवर वर्जन के डिजिटल स्पेस में अपना पहला गाना लेकर आने के लिए। नई सिंगर महक मारू ने इस मामले में अपनी पहली ही जंग जीत ली है। आवाज उनकी तराशी हुई है और भविष्य की असीम संभावनाएं जगाती है।
फीचर फिल्म रचयिता के लिए गाए महक मारू के इस गाने में दो तीन बातें ध्यान खींचती हैं। पहली तो उनकी आवाज ही है। पुरुष गायिकी में इन दिनों मुकाबला बहुत कठिन है, लेकिन महिला गायकों में भी कोई दमदार आवाज अकासा सिंह और ध्वनि भानुशाली के बाद सुनने को मिली नहीं है।
महक इस खाली जगह को भरने आई हैं। उनकी आवाज के आरोह-अवरोह बताते हैं कि उनके सुर रियाज में तपे हुए हैं और आलाप लेने में भी न सुर बहकता है और न आवाज अटकती है। एहसास मखमली है, कुछ कुछ आशा भोसले के शुरूआती दिनों के गानों जैसा।
महक मारू की इस उम्दा गायिकी को कुछ दमदार गीतों और कुछ लीक से इतर संगीत ध्वनियों की जरूरत आगे पड़ेगी। पहले गाने के लिहाज से ज्यादा प्रयोग न करते हुए किशन पालीवाल के एक औसत से गाने पर शान रहमान ने प्रचलित बीट्स पर पूरी कंपोजीशन रच दी है।
डिजिटल का स्पेस विविधता मांगता है। यहां किसी से मिलता जुलता कुछ नहीं चलता। महक मारू की आवाज उन्हें अकासा और ध्वनि से आगे की नहीं तो कम से कम बराबर का गायिका बनाने का माद्दा रखती है। जरूरत है बस जीवन के गुदगुदाते, मुस्कुराते, बहकाते, रुलाते गीतों की और अच्छी स्टोरी बोर्ड पर बने कुछ अतरंगी म्यूजिक वीडियोज की। महक दूर तक जाएगी जरूर।