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डिजिटल रिव्यू: स्वरा भास्कर की मेहनत पर घिसे पिटे फॉर्मूलों का पानी फेरती शॉर्ट फिल्म 'शेम'

Thu, 31 Jan 2019 08:22 AM IST
शिप्रा सक्सेना मुंबई डेस्क, अमर उजाला
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swara bhaskar shame film - फोटो : twitter
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डिजिटल रिव्यू: शेम (शॉर्ट फिल्म)
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कलाकार: स्वरा भास्कर, रणवीर शौरी, सयानी गुप्ता, साइरस साहूकार। निर्देशक: अनुषा बोस
यूट्यूब चैनल: लार्जशॉर्ट फिल्म्स


पास में अच्छी कहानी हो, दमदार कलाकार हों, खर्च करने को अच्छा खासा बजट हो, तो हर निर्देशक की ख्वाहिश यही होती है कि वह एक ऐसी फिल्म बनाए जिसे लोग इसके मकसद के लिए याद रखें। सिनेमा के हुनरमंदों का अपनी हर छोटी बड़ी फिल्म में मकसद तो दर्शकों का मनोरंजन करना ही होता है लेकिन ऐसे निर्देशकों की भी कमी नहीं है जो अक्सर अपनी प्राथमिकता से दर्शकों को हटाकर अपनी बुद्धिमता को तरजीह देने लगते हैं।

निर्देशक अनुषा बोस की शॉर्ट फिल्म 'शेम' दूसरी कैटेगरी की फिल्म है। कहानी एक होटल से शुरू होती है जहां साफ सफाई करने वाली हाउसकीपिंग की एक स्टाफ को बड़े लोगों की निजी जिंदगी में झांकने का मौका मिलता है। शुरूआत में समाज के दो साफ साफ बंटे वर्गों के ख्वाबों ख्यालों का अंतर दिखाने के बाद फिल्म एकदम से टिपिकल मुंबइया फिल्मों की स्टाइल पकड़ लेती है, जहां धोखा है, डर है और है सब कुछ काला-सफेद करके देखने की जल्दबाजी। अच्छाई और बुराई के दो ध्रुवों के बीच की असल जिंदगी को दिखाने का मौका इसी के चलते ये फिल्म खो देती है।
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दिक्कत ये भी कि ये फिल्म अपने किरदारों को गढ़ने के लिए उन्हीं घिसे पिटे फॉर्मूलों पर आगे बढ़ती है, जिनसे हिंदी सिनेमा के दर्शक बोर होते रहते हैं। साफ सफाई करने वाली लड़की के चेहरे पर खूब सारे मुंहासे होने चाहिए। घर में घुटन महसूस करने वालों को रिश्तों की ताजी हवा पाने की कोशिश करते दिखाने के लिए फाइव स्टार होटल की सेटिंग होनी चाहिए। अनुषा बोस को ये समझने की जरूरत है कि कहानियां अब इनके बहुत आगे निकल चुकी हैं। स्वरा भास्कर का अभिनय जरूर फिल्म को आखिर तक देखने की ललक बचाए रखता है। हां, सयानी गुप्ता को अब ये चोला छोड़ने की तुरंत जरूरत है नहीं तो दूसरी राधिका आप्टे बनने में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी है।
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