फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

Bhaukaal 2 Review: गालियों और गोलियों के बीच फंसा आईपीएस, एमएक्स प्लेयर अपनी साख पर कायम

पंकज शुक्ल
Updated Thu, 20 Jan 2022 09:09 AM IST

सार

मुफ्त में एमएक्स प्लेयर देखने वालों के लिए विज्ञापनों के साथ प्रसारित होने वाली सीरीज ‘भौकाल’ के दूसरे सीजन की कहानी वहां से शुरू होती है जहां एक बदमाश की बीवी अपने पति की मौत का बदला लेने के लिए लाखों बहाने को तैयार है और नए नए उगे बदमाश इलाके में अपना रुआब फैलाने के लिए बेकरार हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
भौकाल 2 रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
Movie Review
भौकाल सीजन 2
कलाकार
मोहित रैना , सिद्धांत कपू , प्रदीप नाग , गुल्की जोशी , अजय चौध , बिक्रमजीत कंवरपाल और बिदिता बाग
लेखक
आकाश मोहिमेन , जय शीला बंस और जतिन वागले
निर्देशक
जतिन वागले
निर्माता
समीर नायर और हरमन बावेजा
ओटीटी
एमएक्स प्लेयर
रेटिंग
2/5

उत्तर प्रदेश में साल 2017 से पहले भी गुंडो, बदमाशों और संगठित गिरोह चलाने वाले अपराधियों पर पुलिस कहर बनकर टूट चुकी है। दरअसल हर दौर में कुछ ऐसे पुलिस अफसर होते हैं जिनके लिए किसी अपराधी की कोई एक बात उसके अहं को चोट पहुंचा देती है और वह फिर उसे मारकर एनकाउंटर स्पेशलिस्ट बन जाता है। बताते हैं कि आईपीएस नवनीत सिकेरा अब तक 60 एनकाउंटर कर चुके हैं। सुर्खियों में रहने की उनकी ख्वाहिश पुरानी है। ये कहानी उनके करियर के शुरूआती दिनों की है। मुफ्त में एमएक्स प्लेयर देखने वालों के लिए विज्ञापनों के साथ प्रसारित होने वाली सीरीज ‘भौकाल’ के दूसरे सीजन की कहानी वहां से शुरू होती है जहां एक बदमाश की बीवी अपने पति की मौत का बदला लेने के लिए लाखों बहाने को तैयार है और नए नए उगे बदमाश इलाके में अपना रुआब फैलाने के लिए बेकरार हैं। वेब सीरीज सीरीज ‘भौकाल’ एक टेम्पलेट सीरीज है। टेम्पेलट सीरीज का मतलब वही है जो फॉर्मूला फिल्मों का होता है। इस तरह की सीरीज ढंग से बने तो कमाल होती है और सिर्फ बनाने के बने तो ‘भौकाल’ होती है।

 

विज्ञापन

भौकाल 2 रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

उत्तर प्रदेश में साल 2017 से पहले भी गुंडो, बदमाशों और संगठित गिरोह चलाने वाले अपराधियों पर पुलिस कहर बनकर टूट चुकी है। दरअसल हर दौर में कुछ ऐसे पुलिस अफसर होते हैं जिनके लिए किसी अपराधी की कोई एक बात उसके अहं को चोट पहुंचा देती है और वह फिर उसे मारकर एनकाउंटर स्पेशलिस्ट बन जाता है। बताते हैं कि आईपीएस नवनीत सिकेरा अब तक 60 एनकाउंटर कर चुके हैं। सुर्खियों में रहने की उनकी ख्वाहिश पुरानी है। ये कहानी उनके करियर के शुरूआती दिनों की है। मुफ्त में एमएक्स प्लेयर देखने वालों के लिए विज्ञापनों के साथ प्रसारित होने वाली सीरीज ‘भौकाल’ के दूसरे सीजन की कहानी वहां से शुरू होती है जहां एक बदमाश की बीवी अपने पति की मौत का बदला लेने के लिए लाखों बहाने को तैयार है और नए नए उगे बदमाश इलाके में अपना रुआब फैलाने के लिए बेकरार हैं। वेब सीरीज सीरीज ‘भौकाल’ एक टेम्पलेट सीरीज है। टेम्पेलट सीरीज का मतलब वही है जो फॉर्मूला फिल्मों का होता है। इस तरह की सीरीज ढंग से बने तो कमाल होती है और सिर्फ बनाने के बने तो ‘भौकाल’ होती है।

 

भौकाल 2 रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

उत्तर प्रदेश की देशज बोलियों की समझ रखने वाले जानते हैं कि ‘भौकाल’ शब्द का अर्थ करीब करीब वही है जो ताश के खेल में ब्लफ का होता है। भौकाल बनाकर रहने वाले बदमाश अधिकतर मामलों में पुलिस के हाथों ढेर होते हैं और भौकाल बनाकर नौकरी करने वाले पुलिस अफसर अपने आका नेताओं की सरकार जाते ही हाशिये पर आ जाते हैं। उत्तर प्रदेश के पुलिस अफसरों की जीवनी पर फिल्म बनाने का सिलसिला ‘सहर’ से शुरू माना जा सकता है। राम गोपाल वर्मा की फिल्म ‘अब तक 56’ के दिनों में नवनीत सिकेरा पर भी खूब टीवी शो बने। सिकेरा ने जो किया उसे मोहित रैना वर्दी पहनकर वेब सीरीज ‘भौकाल’ में जी रहे हैं। इसके पहले सीजन में निशाने पर शौकीन था, इस बार बंदूक डेढ़ा भाइयों की तरफ घूम गई है। पुलिस की छवि बदलने की एक पुलिस अफसर की कोशिश, इलाके के बदमाशों में एक पुलिस अफसर की सक्रियता के खिलाफ गोलबंदी, बदमाशों की मर्दानगी ललकारती उनके बीच की ही औरतें और मुजफ्फरनगर के नक्शे पर बार बार उभरते गांवों में नुक्कड़ नाटकों सरीखी अपराधों की नुमाइश है। बस इतनी सी ही है, वेब सीरीज ‘भौकाल 2’।

 

भौकाल 2 रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

वेब सीरीज ‘भौकाल 2’ उन लोगों के लिए बनी है जिन्हें मोबाइल पर मुफ्त में सीरीज देखने में मजा आता है। बैठकी में लगे स्मार्ट टीवी पर इसे गलती से भी चलाने की गलतियां न करें क्योंकि इसके हर सीन में इतनी गालियां हैं कि आपके घर वाले अपने कमरों और किचन से निकलकर बाहर आ सकते हैं। सीरीज अच्छी हो। गालियां दृश्य की जरूरत हो तो समझ आता है। लेकिन, यहा तो किरदार गालियों की तुकांत कविता भी बनाते दिखते हैं और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की शायद ही कोई गाली बची हो जो इसके लेखकों ने इस सीरीज में इस्तेमाल न कर डाली हो। और, ये दिक्कत सिर्फ वेब सीरीज ‘भौकाल’ की नहीं है। अपराध पर बनी हर वेब सीरीज का खांचा एक जैसा हो चुका है। यहां मर्दानगी को लानत भेजने का काम जरूरत से ज्यादा मेकअप में दिखने वाली बिदिता बाग को मिला है।

Bhaukaal Season 2: खत्म हो गया इंतजार, Mx Player पर इतने बजे रिलीज होगा 'भौकाल 2', वर्दी में गुंडों का खात्मा करेंगे SSP सिकेरा

भौकाल 2 रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

वेब सीरीज ‘भौकाल 2’ में अधिकतर कलाकार ऐसे हैं जो इसके बनने के दिनों में कुछ भी करने को तैयार रहे होंगे। मोहित रैना की ढीली शर्ट और बार बार कैमरे का उनका पेट दिखाने से बचने की कोशिश करना समझाता है कि कभी ‘महादेव’ बन चुके मोहित ने सिकेरा बनने के लिए वैसी मेहनत नहीं की। उनका डील डौल जरूर गठीला है लेकिन एक आईपीएस अफसर की रवानी उनकी चाल ढाल में नहीं दिखती। गर्भवती बीवी को डॉक्टर को दिखाने ले गए आईपीएस का ये कहना कि मुझे तो हर समय इनके साथ रहना जरूरी है, कहानी के साथ साथ उनके किरदार को भी कमजोर करता है। सिद्धांत कपूर ने कोशिश तो की है लेकिन उनका रुआब बनता नहीं दिखता। संवादों की अदायगी उनकी ओढ़ी हुई सी लगती है। प्रदीप नागर ने जरूर बेहतर काम किया है। सीरीज देखकर बिक्रमजीत कंवरपाल की याद दर्शकों को खूब आती है। पहली मई को उन्हें गुजरे साल भर हो जाएगा।

भौकाल 2 रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

एमएक्स प्लेयर की साल भर पहले तक शूट होती रही सीरीज में पूरा ध्यान इन्हें पटरियों पर बिकने वाली वैसी किताबें बनाने पर रहा, जिन्हें लाखों लोग पढ़ते तो खूब है लेकिन जिन्हें लाकर कोई अपनी बुकशेल्फ में नहीं रखता। ओटीटी वैसे भी देखे जाने का खेल है। सीरीज कैसी निकली, इससे फर्क नहीं पड़ता। दर्शक ने देख ली। ओटीटी के मिनट जमा हो गए, बस। वेब सीरीज ‘भौकाल 2’ की तकनीकी टीम का ब्रीफ भी शायद यही रहा होगा। लातें मारने की आवाज पर चाकू मारने जैसी आवाजें आती हैं और टू इन वन लेकर घूमते बदमाश को संगीत से लगाव है भी कि नहीं समझाने तक में सीरीज चूक जाती है। पूरी सीरीज की पटकथा बहुत ही चलताऊ ढंग से लिखी गई है। लेखन की पूरी क्रिएटिविटी इसकी गालियों में है। कैमरा और पार्श्वसंगीत भी बहुत ज्यादा मदद नहीं करता। गाली गलौज, गोलीबारी और अपनी गमक में रहने वालों की कहानी कहती वेब सीरीज ‘भौकाल 2’ अपने नाम के हिसाब से तंबू तो खूब ऊंचा तानने की कोशिश करती है, लेकिन न इसके बांस इतने ऊंचे निकले और न ही शामियाना।

 
और पढ़ें...
विज्ञापन
विज्ञापन
Next