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'अब तक छप्पन 2' का सिर्फ नाम काफी नहीं है

Fri, 27 Feb 2015 11:10 AM IST
रवि बुले /अमर उजाला, मुंबई
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नाना पाटेकर अभिनीत फिल्म अब तक छप्पन 2 आज रिलीज हो चुकी है। जानिए, फिल्म आपके देखने लायक है या नहीं।
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जो भी कहना मुंह पर कहना, पीठ पीछे नहीं। फिल्म में एनकाउंटर स्पेशलिस्ट साधु अगाशे बने नाना पाटेकर साफ-साफ कहते हैं। तो सीधी-साफ बात यही कि अब तक छप्पन-2 प्रभावित नहीं करती।

निर्देशक शिमित अमीन की अब तक छप्पन (2004) ने वक्त और दर्शकों के दिल-दिमाग पर जो छाप छोड़ी थी, उसकी सीक्वल फिल्म वैसा नहीं कर पाती। यहां पूरा भार नाना के कंधों पर है।
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मगर अच्छी कहानी के अभाव में पूरा दम लगाने के बावजूद नाना फिल्म को नई ऊंचाई नहीं दे पाते। वैसे प्रशंसक चाहें तो जरूर फिल्म देख सकते हैं क्योंकि नाना का अंदाज बांधे रखने में सक्षम है।

यह फिल्म अब तक छप्पन की कहानी के आगे का दौर बताती है। एनकाउंटरों की वजह से साधु यादव पर कुछ मुकदमे चल रहे हैं और पत्नी को खोने के बाद यह नायक गांव की नदी में मछलियां पकड़ते हुए बेटे के साथ दिन बिता रहा है।

मुंबई में हालात फिर बिगड़ते हैं और माफिया को खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री-गृहमंत्री को तेज-तर्रार अफसर की जरूरत है।

साधु फिर से उस जीवन में नहीं लौटना चाहता जहां उसने बड़ी कीमत चुकाई थी, परंतु बेटा उसे याद दिलाता है कि वह मछलियां पकड़ने के लिए नहीं पैदा हुआ। वह पुलिसवाला है। वंस अ कॉप, ऑलवेज अ कॉप। साधु की वापसी अंडरवर्ल्ड में दहशत पैदा करती है।

उस पर हमले होते हैं, लेकिन वह दहशतगर्दों को ठिकाने लगाने के मिशन में जुट जाता है। इस बार वह क्या खोता है और उसकी वापसी के पीछे भी क्या कोई षड्यंत्र है, यह राज फिल्म में धीरे-धीरे खुलता है।

पुलिस एनकाउंटरों लेकर बीते कई बरसों में बहुत कुछ कहा और लिखा जा चुका है। कई फिल्में बन चुकी हैं। ऐसे में अब तक छप्पन-2 कुछ नया नहीं प्रस्तुत करती। बेईमान, स्वार्थी और पुलिस का अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करने वाले नेताओं के चित्रण में भी अनूठापन नहीं है।

नाना के तीखे-चुटीले संवाद जरूर कुछ मौकों पर दर्शकों का दिल छू जाते हैं। वहीं मुख्यमंत्री बनने का सपना देखने वाले विक्रम गोखले के चरित्र के कुछ डीटेल्स अंतिम क्षणों में आकर्षक ढंग से सामने आते हैं। बाकी कलाकार सामान्य हैं।
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एक्शन डायरेक्टर से निर्देशक बने एजाज गुलाब की यह पहली फिल्म है। तकनीकी स्तर पर वे निराश नहीं करते, मगर रोचक कहानी कहने की क्षमता को साबित करने के लिए उन्हें नई फिल्म बनानी होगी। अब तक छप्पन और नाना का नाम इस फिल्म में तो उनके काम नहीं आया है।
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