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संगीत निर्देशन की शुरुआत
संगीत की बारीकियों को उन्होंने मलयालम संगीत निर्देशक सी राजामणि और तेलुगु म्यूजिक डायरेक्टर के चक्रवर्ती से सीखा। 1987 में उन्होंने सहायक संगीत निर्देशक के रूप में करियर की शुरुआत की। हालांकि स्वतंत्र संगीतकार के रूप में उन्हें पहला बड़ा मौका फिल्म ‘कल्कि’ से मिला, लेकिन दुर्भाग्यवश वो फिल्म कभी रिलीज नहीं हुई। उनकी किस्मत तब बदली जब राम गोपाल वर्मा की फिल्म ‘क्षण क्षणम’ (1991) आई। फिल्म के गानों ने उन्हें रातोंरात दक्षिण भारत का चर्चित संगीतकार बना दिया।
हिंदी सिनेमा में भी छोड़ी छाप
एम एम कीरवानी का बॉलीवुड डेब्यू हुआ फिल्म क्रिमिनल (1994) से। इसके बाद उन्होंने जख्म, साया, इस रात की सुबह नहीं, सुर, जिस्म, पहेली जैसी फिल्मों में भी संगीत दिया। ‘गली में आज चांद निकला’, ‘जादू है नशा है’ और ‘आवारापन बंजारापन’ जैसे सुपरहिट गानों ने हिंदी ऑडियंस को भी उनका दीवाना बना दिया।
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‘नाटू नाटू’ से किया भारत को गौरवान्वित
2023 में एस एस राजामौली की फिल्म आरआरआर का गाना ‘नाटू नाटू’ इतिहास रच गया। कीरवानी द्वारा संगीतबद्ध इस गाने ने ऑस्कर में बेस्ट ओरिजिनल सॉन्ग का अवॉर्ड जीतकर भारत का नाम रोशन किया। इसके पहले ये गाना गोल्डन ग्लोब अवॉर्ड भी जीत चुका था।
एम एम कीरवानी को मिल चुके कई अवॉर्ड्स
एम एम कीरवानी को उनके करियर में कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। उन्हें 1 ऑस्कर अवॉर्ड, 1 गोल्डन ग्लोब, 2 नेशनल फिल्म अवॉर्ड, 11 नंदी अवॉर्ड, 8 फिल्मफेयर अवॉर्ड, 1 LAFCA अवॉर्ड,1 क्रिटिक्स चॉइस मूवी अवॉर्ड मिल चुका है।
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