अमर उजाला और अंजना वेलफेयर सोसायटी के सहयोग से रिदम कला महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस महोत्सव के दौरान संगीत एवं नृत्य की कार्यशाला आयोजित की जा रही है। 26 जनवरी से शुरू हुआ यह कला महोत्सव 45 दिन तक आयोजित किया जाएगा। इस बारे में अंजना वेलफेयर सोसाइटी की फाउंडर कथक नृत्यांगना माया कुलश्रेष्ठ ने बताया कि यह कला महोत्सव बीते 8 सालों से आयोजित किया जा रहा है और आगे भी ऐसे ही आयोजित किया जाएगा। इस महोत्सव का मकसद युवाओं को भारतीय संस्कृति से जोड़ना है।
डॉक्टर रामा देवी ने बताया कि इस नृत्य का नाम कृष्णा जिले में स्थित कुचिपुड़ी गांव के नाम पर रखा गया है। पुराने समय में कुचिपुड़ी गांव के ब्राह्मण इस नृत्य का अभ्यास किया करते थे। यह उस समय का एक पारंपरिक नृत्य हुआ करता था। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार कुचिपुड़ी नृत्य मूलतः सिर्फ ब्राह्मण समुदाय के पुरुष द्वारा ही किया जाता था। इस नृत्य के दौरान पुरुष की महिलाओं का अभिनय भी किया करते थे।
नाट्यशास्त्र के बारे में बताते हुए डॉक्टर रामादेवी ने कहा कि नाट्य शास्त्र सिर्फ नाटक पर आधारित है, इसमें नृत्य का कोई जिक्र नहीं मिलता है। इस दौरान उन्होंने नाट्यशास्त्र एवं नाट्य के दशरूपक के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि भरतमुनि के नाट्यशास्त्र का आज भी बहुत सम्मान किया जाता है। नाट्य शास्त्र में सिर्फ नाट्य रचना के नियमों का आकलन नहीं होता। बल्कि अभिनेता, रंगमंच और प्रेषक इन तीनों तत्वों की पूर्ति के साधनों का विवेचन भी होता है। 37 अध्यायों में भरत मुनि ने रंगमंच, अभिनेता, अभिनय, नृत्यगीतवाद्य, दर्शक, दशरूपक और रस निष्पत्ति से जुड़े सभी तथ्यों का विवेचन किया है।
गौरतलब है कि महोत्सव के तहत होने वाली सभी कार्यशालाएं पूरी तरह निशुल्क हैं। इसके तहत 45 दिन का ऑनलाइन कार्यक्रम है। वहीं तीन दिन का कार्यक्रम ऑफलाइन होगा। कार्यशाला के दौरान कार्यक्रम की संचालिका माया कुलश्रेष्ठ ने जानकारी दी कि इस कार्यक्रम से जुड़ने के लिए अंजना वेलफयेर सोसाइटी के फेसबुक पेज पर जाकर इस कार्यक्रम से जुड़ सकते हैं।