11 साल की उम्र में लिखी पहली गजल
कैफी आजमी को बचपन से लिखने का शौक था। जब वह महज 11 साल के थे, तो उन्होंने एक मुशायरे में शिरकत की। यहां उन्होंने 'इतना तो जिंदगी में किसी के खलल पड़' गजल पढ़ी। इसे लोगों ने खूब पसंद किया। कैफी आजमी के पिता को लगा कि उन्होंने अपने बड़े भाई की गजल पढ़ी है। इसके बाद पिता ने उनका टेस्ट लिया कि क्या यह गलज कैफी ने खुद लिखी है? कैफी आजमी इसमें पास हो गए।
बतौर एक्टर किया काम
कैफी आजमी ने फिल्मों में लिरिसिस्ट के अलावा एक लेखक और एक्टर के तौर पर काम किया है। उन्होंने सबसे पहले फिल्म 'बुजदिल' के लिए लिरिक्स लिखे। उन्होंने एक लेखक के तौर पर सबसे अच्छा काम 'हीर रांझा' में किया। उन्होंने इस फिल्म के डायलॉग लिखे थे, जो शायरी के रूप में थे। साल 1995 में रिलीज हुई फिल्म 'नसीम' में उन्होंने अदाकारी भी की। इसमें उन्होंने नसीम के दादा का रोल किया था।
कैफी आजमी को कौन से अवॉर्ड मिले?
कैफी आजमी को पद्मश्री से नवाजा जा चुका है।
उन्हें उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी से अवॉर्ड मिल चुका है।
'आवारा सजदे' के लिए साहित्य अकादमी अवॉर्ड फॉर उर्दू मिला है।
महाराष्ट्र उर्दू अकादमी का स्पेशल अवॉर्ड, सोवियत लैंड नेहरू अवॉर्ड मिला है।
एफ्रो-एशियन राइटर असोसिएशन की तरफ से लोटस अवॉर्ड मिला है।