सुदर्शन फाकिर उर्दू के उन चंद शायरों में शुमार होते थे, जो गैर मुस्लिम थे। सुदर्शन फाकिर वही शख्स थे, जिनकी गजलों को गजल गायक जगजीत सिंह ने गाया है। सुदर्शन फाकिर की गजलों को बेगम अख्तर ने भी गाया। सुदर्शन फाकिर ने गजलों के अलावा कई हिंदी फिल्मों के लिए गाने भी लिखे।
शुरुआत में ही छोड़ दी आपनी छाप
सुदर्शन फाकिर पंजाब के जालंधर में साल 1934 में पैदा हुए। वह अपने कॉलेज के दिनों में शेर व शायरी लिखते थे और ड्रामों में काम किया करते थे। अपने कॉलेज के दिनों में सुदर्शन ने 'अशद का एक दिन' प्ले का निर्देशन किया। मुंबई जाने के बाद सुदर्शन फाकिर ने 'दूरियां' फिल्म का 'जिंदगी, जिंगदी मेरे घर आना जिंदगी' गाना लिखा। उन्होंने 'यलगार' फिल्म के डॉयलॉग लिखे। उनके ये दोनों काम आज भी बहुत मशहूर हैं।
जगजीत सुदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
फिल्ममेयर अवॉर्ड जीतने वाले पहले गीतकार
सुदर्शन फाकिर ने अपने गानों से लोगों का दिल तो जीता ही, उन्होंने बॉलीवुड पर भी राज किया। उन्होंने 'बरसात के मौसम में', 'आखिर तुम्हें आना है' जैसे गाने लिखे। सुदर्शन फाकिर पहले ऐसे गीतकार थे, जिन्होंने 'फिल्मफेयर अवॉर्ड' जीता। सुदर्शन फाकिर ने फिल्मी गानों और गजलों के अलावा धार्मिक गाने 'हे राम... हे राम' लिखा।
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एनसीसी गाने को लिखा
सुदर्शन फाकिर की मकबूलियत का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) का गाना 'हम सब भारतीय हैं' उन्होंने ही लिखा है। यह गाना पूरे देश में गाया जाता है।
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मलिका-ए-गजल के पसंदीदा थे सुदर्शन
सुदर्शन फाकिर ऐसे शायर थे जो 'मलिका-ए-गजल' बेगम अख्तर के सबसे पसंदीदा थे। बेगम अख्तर ने उनकी पांच गजलों को गाया। बेगम अख्तर ने जगजीत सिंह के साथ मिलकर सुदर्शन फाकिर की गजल 'वो कागज की कश्ती' गाई है।
बेटा भी है गीतकार
सूदर्शन फाकिर ने सुदेश से शादी की। दोनों से एक संतान मानव फाकिर है। मानव भी बॉलीवुड के गीतकार हैं। सुदर्शन फाकिर अपनी जिंदगी के आखिरी दिनों में लंबी बीमारी से जूझते थे। अपने आखिरी दिनों में वह जालंधर वापस आ गए। 73 साल की उम्र में उन्होंने 19 फरवरी 2008 को आखिरी सांस ली।
सुदर्शन फाकिर के बारे में खास
सुदर्शन फाकिर ने अपने लिखने पर खासकर अपनी गजलों पर बहुत मेहनत की। वह ऐसे शायर हैं जो लेखन के लिए जी रहे थे। उन्होंने अपने शेरों के मजमूए 'दीवान' को तब छपवाया, जब वह बहुत बड़े शायर बन गए। फाकिर उन शायरों में शुमार होते हैं, जिनको भुलाया जा रहा है, लेकिन उनकी गजलें लोगों की जबान पर चढ़ी हैं।