ईशान खट्टर और नीरज घेवान
- फोटो : इंस्टाग्राम-@ishaankhatter
शूटिंग का अनुभव कैसा रहा?
बहुत भावनात्मक रहा। हमने ज्यादातर फिल्म को क्रमवार (chronological order) शूट किया ताकि किरदार की यात्रा को सच में जी सकें। भोपाल और मध्य प्रदेश में दो महीने रहकर 90% फिल्म एक ही शेड्यूल में शूट की। क्लाइमेक्स सबसे आखिर में शूट हुआ, जिससे हम पूरी तरह उस सफर में डूब चुके थे। यह मेरे करियर की अब तक की सबसे खूबसूरत यात्रा रही।
इस रोल का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा क्या था?
सबसे मुश्किल यह था कि इस किरदार को सिर्फ अभिनय के रूप में नहीं, बल्कि सचमुच जीना था। नीरज चाहते थे कि हम सिर्फ परफॉर्म न करें, बल्कि इन किरदारों की सोच और तकलीफ को भीतर तक महसूस करें। किरदार का सामाजिक और इमोशनल बोझ इतना गहरा था कि कई बार शूटिंग के बाद भी मैं उससे बाहर नहीं निकल पाता था।
ईशान खट्टर और विशाल जेठवा
- फोटो : इंस्टाग्राम-@ishaankhatter
सबसे चुनौतीपूर्ण सीन कौन-सा था?
फिल्म का क्लाइमेक्स मेरे लिए सबसे कठिन था। क्योंकि तब तक हम किरदार के साथ जी चुके थे और सीन भावनात्मक रूप से बेहद भारी था। उस सीन में सच्चाई लाना, बिना जरूरत से ज्यादा नाटकीयता के, सबसे बड़ी चुनौती थी।
आपके को-स्टार्स विशाल जेठवा और जान्हवी कपूर के साथ अनुभव कैसा रहा?
विशाल के साथ मेरा बहुत खास बॉन्ड बना। हम दोनों ने साथ में गांव की यात्राएं कीं, प्रैक्टिस की और किरदारों को गहराई से समझा। वह एक बेहद समर्पित और टैलेंटेड अभिनेता हैं। जान्हवी के साथ पहले ‘धड़क’ में काम किया था। वह हमेशा ईमानदारी और मेहनत से काम करती हैं। दोस्ती और पेशेवर रिश्ता दोनों ही हमारे बीच बहुत अच्छे हैं। यह देखना अच्छा लगता है कि हम सब अपनी-अपनी जगह पर आगे बढ़ रहे हैं।
ईशान खट्टर और विशाल जेठवा
- फोटो : इंस्टाग्राम-@ishaankhatter
जब आपको पता चला कि फिल्म भारत की तरफ से ऑस्कर के लिए चुनी गई है तो आपकी प्रतिक्रिया क्या थी?
वो पल मेरी जिंदगी का सबसे भावुक और अविस्मरणीय पल था। मैं फ्लाइट में था, टोरंटो से न्यूयॉर्क जा रहा था। नेटवर्क बार-बार चला जा रहा था। अचानक कनेक्शन आया तो फोन पर ढेरों मैसेज आ गए। सबसे ऊपर नीरज सर का मैसेज था ...पहली बार उन्होंने मुझे डांटा, लिखा - 'तू फोन क्यों नहीं उठा रहा है?' और उसके साथ यह खबर कि हम ऑस्कर जा रहे हैं। मैं स्तब्ध रह गया। आंखें नम हो गईं। सोचिए, मैं सचमुच हवा में था और उसी पल जिंदगी ने मुझे सबसे बड़ी उड़ान दे दी।
आपके परिवार की प्रतिक्रिया कैसी रही?
मां ने मेरी पहली फिल्म 'बियॉन्ड द क्लाउड्स' के बाद कहा था, 'तुम कौन हो?' यह मेरे लिए सबसे गहरा कॉम्प्लिमेंट था। 'होमबाउंड' देखकर वो फिर उतनी ही भावुक हुईं। कान फिल्म फेस्टिवल में जब उन्होंने मेरे साथ फिल्म देखी, उनकी आंखों में जो गर्व और प्यार था, मैं कभी नहीं भूलूंगा। पापा ने हाल ही में फिल्म देखी और सबके सामने कहा - 'आज मैं अपने बेटे से अभिनय सीखूंगा।' यह सुनकर मेरे रोंगटे खड़े हो गए। शाहिद भाई अभी शूटिंग में हैं, उन्होंने फिल्म नहीं देखी, लेकिन मीरा ने देखी और मुझे गले लगाकर कहा कि उन्हें मुझ पर गर्व है। अपने परिवार का साथ और आशीर्वाद पाना मेरे लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है।
यह खबर भी पढ़ेंः Homebound: लाखों में सिमटी ऑस्कर में भेजी गई ‘होमबाउंड’, क्या वीकेंड पर मिलेंगे दर्शक?
ईशान खट्टर, विशाल जेठवा और जान्हवी कपूर
- फोटो : इंस्टाग्राम-@janhvikapoor
आपके हिसाब से समाज में सिनेमा की भूमिका क्या है?
सबसे बुनियादी स्तर पर सिनेमा का काम मनोरंजन है। लेकिन असली ताकत तब है जब सिनेमा आपको किसी और की जिंदगी जीने का मौका दे। जब आप अंधेरे हाल में बैठकर किसी और की कहानी दो-तीन घंटे तक जीते हैं, तो यह हीलिंग होता है। अगर फिल्म सोचने पर मजबूर करे और दिल को छुए, तो यह कला का सबसे ऊंचा रूप है। ‘होमबाउंड’ ऐसी ही फिल्म है और मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं कि इसका हिस्सा बना।
आगे किस तरह के रोल करना चाहेंगे?
मैं ऐसे रोल करना चाहता हूं जो मेरे अंदर को हिला दें, मुझे और इंसानियत के करीब ले जाएं। हां, कमर्शियल फिल्में भी मजेदार होती हैं, लेकिन अगर किरदार लोगों के दिल में जगह बनाए और समाज को सोचने पर मजबूर करे, तो वही मेरे लिए सबसे अहम है।