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Guru Dutt: बड़े-बड़े पहाड़ चढ़ गया सिनेमा का यह सितारा, लेकिन अधूरी मोहब्बत के गम में हार गया जिंदगी!

Thu, 10 Oct 2024 07:11 AM IST
ज्योति राघव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

गुरु दत्त का जन्म 9 जुलाई 1925 को बेंगलुरु में हुआ था। उनका असली नाम वसंत कुमार शिवशंकर पादुकोण था। गुरु दत्त का जन्म बेहद गरीबी और तकलीफों में बीता था। 
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Guru Dutt - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गुरु दत्त! वह शख्स, जिसने 39 साल का जीवन जीया, लेकिन इस छोटी सी जिंदगी में सिनेमा को कई यादगार फिल्में दीं। गुरुदत्त 50 और 60 के दशक के मशहूर अभिनेता, निर्माता और निर्देशक थे। उन्होंने कोरियोग्राफी के क्षेत्र में भी अपना लोहा मनवाया। गुरु दत्त ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत बतौर कोरियोग्राफर ही की थी। फिर उन्होंने अभिनय में हाथ आजमाए और निर्देशन की दुनिया में कदम रखे। आज गुरु दत्त की पुण्यतिथि है। आइए जानते हैं उनके बारे में...

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आर्थिक तंगी के चलते 10वीं के बाद नहीं की पढ़ाई
गुरु दत्त का जन्म 9 जुलाई 1925 को बेंगलुरु में हुआ था। उनका असली नाम वसंत कुमार शिवशंकर पादुकोण था। गुरु दत्त का जन्म बेहद गरीबी और तकलीफों में बीता था। पढ़ाई में अच्छे होने के बावजूद 10वीं के बाद वो आगे नहीं पढ़ सके, क्योंकि उतने पैसे उनके परिवार के पास नहीं थे। 

'हम एक हैं' से शुरू किया फिल्मी सफर
संगीत और कला में रुचि होने के चलते गुरु दत्त ने अपनी प्रतिभा से स्कॉलरशिप हासिल की और उदय शंकर इंडिया कल्चर सेंटर में दाखिला ले लिया, जहां से उन्होंने डांस सीखा। 5 साल तक उदय शंकर से डांस सीखने के बाद गुरु दत्त को पुणे के प्रभात स्टूडियो में बतौर कोरियोग्राफर काम करने का मौका मिला। साल 1946 में गुरुदत्त ने प्रभात स्टूडियो की एक फिल्म 'हम एक हैं' से बतौर कोरियोग्राफर अपना फिल्मी करियर शुरू किया।

इस तरह जिंदगी में आईं गीता दत्त
कोरियोग्राफर के बाद गुरु दत्त को प्रभात स्टूडियो की फिल्म में एक्टिंग का मौका भी मिला। इसी दौरान ही उन्होंने 'प्यासा' की कहानी लिखी और बाद में इसी पर फिल्म बनाई। साल 1951 में देवानंद की फिल्म 'बाजी' की सक्सेस के बाद गुरु दत्त बतौर निर्देशक अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो गए। इस फिल्म के दौरान गुरु दत्त और गीता दत्त करीब आए और साल 1953 में उन्होंने शादी कर ली। लेकिन, यह शादी कुछ साल बाद टूट गई। कहा जाता है कि गुरु दत्त की करीबी वहीदा रहमान से बढ़ीं और इस वजह से उनके और गीता दत्त के झगड़े शुरू हो गए। झगड़े इतने बढ़े कि शादी टूट गई।
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दुनिया को कहा अलविदा
'प्यासा', 'साहब, बीवी और गुलाम', 'चौदहवीं का चांद' जैसी बेमिसाल फिल्में देने वाले गुरु दत्त उस वक्त दिवालिया हो गए जब 'कागज के फूल' फ्लॉप हो गई। एक ओर जहां वो वहीदा रहमान को नहीं अपना पाए तो वहीं दूसरी ओर फिल्म में नुकसान की वजह से गुरुदत्त बिल्कुल टूट चुके थे और उन्होंने 2 बार आत्महत्या की कोशिश की थी लेकिन तीसरी बार उनकी जान चली गई। 39 साल की उम्र में गुरु दत्त अपने बेडरूम में मृत पाए गए। ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने पहले खूब शराब पी और उसके बाद ढेर सारी नींद की गोलियां खा ली थीं।
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