वसंत कुमार शिवशंकर पादुकोण, जिन्हें सिनेमा की दुनिया में लोग गुरु दत्त के रूप में जानते हैं। आज उन्ही गुरु दत्त की बर्थ एनिवर्सरी है। गुरु दत्त का कुल जीवन 39 वर्ष का रहा। मगर, इतनी कम उम्र में ही उन्होंने हिंदी सिनेमा में बड़ी लकीर खींच दी। गुरु दत्त का फिल्मी करियर जितना विस्तृत रहा है, उनका निजी जीवन उतनी ही तकलीफों से गुजरा। छोटी उम्र से संघर्ष करते हुए वे आगे बढ़े, नाम कमाया और एक दिन तकलीफों से गुजरते हुए उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। आइए जानते हैं उनके बारे में...
उपनाम में किया बदलाव
9 जुलाई, 1925 को बंगलुरू में जन्मे गुरु दत्त के पिता हेडमास्टर थे और बाद में बैंक में काम करने लगे। मां शिक्षिका थीं। गुरु दत्त का बचपन कोलकाता में बीता। गुरु दत्त ने कोलकाता में पढ़ाई लिखाई की। कहा जाता है कि वहां रहते हुए उन्होंने अपना उपनाम पादुकोण से दत्त कर लिया था, क्योकि दत्त बंगाली सर नेम है। गुरुदत्त मेधावी छात्र थे। लेकिन, पैसों की कमी की वजह से उन्होने उदय शंकर का ग्रुप ज्वाइन किया। उस दौर में उदय शंकर मशहूर डांसर थे। गुरु दत्त ने फिल्मों में बतौर डांस डायरेक्टर से शुरुआत की थी। गुरु दत्त को कला और नृत्य की प्रेरणा घर से मिली। उनकी दादी नियमित रूप से शाम को दीया जलातीं। तब 14 वर्षीय गुरु दत्त दिये की रौशनी में दीवार पर अपनी उंगलियों से अलग-अलग मुद्राओं में तरह-तरह के चित्र बनाते रहते। यहीं से उनके मन में कला के प्रति भाव जागे।
Sonakshi-Zaheer: 'यह दिन,यह पल...' जहीर ने साझा की सात साल पहले की तस्वीर, 2017 में हुई थी सोनाक्षी से मुलाकात
पुणे जाकर की नौकरी
16 साल की उम्र में गुरु दत्त ने पांच साल के लिये 75 रुपये वार्षिक छात्रवृत्ति पर अल्मोड़ा जाकर नृत्य, नाटक व संगीत की तालीम लेनी शुरू। हालांकि, 1944 में द्वितीय विश्वयुद्ध के कारण उदय शंकर इंडिया कल्चर सेंटर बंद होने पर वे वापस अपने घर लौट आए। आर्थिक कठिनाइयों के कारण गुरु दत्त स्कूल जाकर पढ़ाई तो निरंतर नहीं रख सके, लेकिन उदय शंकर की संगत में रहकर उन्होंने कला और संगीत के कई गुण जरूर सीख लिए थे। यही प्रतिभा आगे फिल्म निर्माण में भी उनके लिए मददगार रही। मुंबई आने से पहले गुरु दत्त ने कोलकाता में टेलीफोन ऑपरेटर की नौकरी भी की थी, लेकिन जल्द ही वे वहां से इस्तीफा देकर अपने माता-पिता के साथ मायानगरी आ गए। उस जमाने में मुंबई के नजदीकी शहर पुणे में ज्यादा फिल्में बनाई जाती थी। वहीं की प्रभात फिल्म कम्पनी में गुरु दत्त को नौकरी मिल गई। यहां पर गुरु दत्त बतौर डांस डायरेक्टर काम कर रहे थे और असिस्टेंट डायरेक्टर भी।
Neetu Kapoor: आलिया ने बताया ताकत, तो करीना ने बताया प्रेरणा, नीतू कपूर के जन्मदिन पर सितारों ने दी शूभकामनाएं
कमीज ने कराई देव आनंद से दोस्ती
प्रभात स्टूडियो में गुरू दत्त को पक्का दोस्त मिला। वह कोई और नहीं, देव आनंद थे। इसका भी दिलचस्प किस्सा है। दोनों के कपड़े एक ही धोबी के यहां धुला करते थे। एक बार धोबी ने गलती से गुरु दत्त की कमीज देव आनंद के यहां और उनकी कमीज गुरु दत्त के यहां पहुंचा दी। दोनों ने वो कमीज पहन भी ली और दोनों को कमीज बदलने का पता भी नहीं लगा। जब देव आनंद स्टूडियो में घुस रहे थे तो गुरु दत्त ने उनका हाथ मिलाकर स्वागत किया और अपना परिचय देते हुए कहा कि, 'मैं निर्देशक बेडेकर का असिस्टेंट हूं।' अचानक उनकी नजर देव आनंद की कमीज पर गई। वो उन्हें कुछ पहचानी हुई सी लगी और उन्होंने छूटते ही पूछा, 'ये कमीज आपने कहां से खरीदी?' देव आनंद थोड़ा सकपकाए लेकिन बोले, 'ये कमीज मेरे धोबी ने किसी की सालगिरह पर पहनने के लिए दी है। लेकिन जनाब आप भी बताएं कि आपने अपनी कमीज कहां से खरीदी?' गुरु दत्त ने शरारती अंदाज में जवाब दिया कि ये कमीज उन्होंने कहीं से चुराई है। दोनों ने एक दूसरे की कमीज़ पहने हुए ज़ोर का ठहाका लगाया, एक दूसरे से गले मिले और हमेशा के लिए एक दूसरे के दोस्त हो गए।
Low Budget Movies: कम लागत से बनी इन फिल्मों ने की बंपर कमाई, सूची के दो नाम कर देंगे हैरान
और साथ मिला तो पलट गई किस्मत
पुणे में साथ घूमते हुए गुरु दत्त ने देव आनंद से वादा किया कि, 'देव अगर कभी मैं निर्देशक बनता हूं तो तुम मेरे पहले हीरो होगे।' गुरु दत्त की बात सुनकर देव ने भी उतनी ही गहनता से जवाब दिया, 'और तुम मेरे पहले निर्देशक होगे अगर मुझे कोई फिल्म प्रोड्यूस करने को मिलती है।' देव आनंद को अपना वादा याद रहा और जब नवकेतन फिल्म्स ने 'बाजी' बनाने का फैसला किया तो निर्देशन की जिम्मेदारी उन्होंने गुरु दत्त को दी। 'बाजी' फिल्म हिट साबित हुई और उसने उनके जीवन को बदल दिया।
Jaanam Song: 'जानम' गाने के प्रोमो में दिखा विक्की और तृप्ति का रोमांस, यूजर ने कहा- कैटरीना दीदी, मैं ना सहती