सुभाष सिंगठिया ने बताया कि यह आयोजन इलाके में एक नई घटना है, जिससे यह इलाक़ा दुनिया के सांस्कृतिक नक्शे पर अपनी जगह बनाएगा, इलाके की प्रतिभाओं को फिल्मी दुनिया की इंटरनेशनल शख्सियतों को करीब से देखने, बात करने और जुड़ने के मौके मिलेंगे। शहर के पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, देशी ही नहीं विदेशी फिल्मकारों के आने से शहर को बिजनेस के लिहाज से फायदा होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस फेस्टिवल से इलाके की कहानियों पर फ़िल्म बनने के रास्ते खुलेंगे और लोकल टैलेंट फ़िल्म संसार के अलग -अलग कामों के लिए आगे आ पाएँगे, फेस्टिवल से उन्हें प्रेरणा, मार्गदर्शन और मौका मिलेगा।
छोटे शहर में क्यों?
मुम्बई से शहर आए हुए डॉ दुष्यंत ने कहा कि ऐसे आयोजन बड़े शहरों में होते हैं क्योंकि वहां करना आसान होता है, पर हमें लगता है कि चुनौतीपूर्ण भले ही हो पर छोटे शहरों में ऐसे आयोजनों की सार्थकता और ज़रूरत ज्यादा है, दुनिया में कई ऐसे शहर या छोटी जगहें है, जिन्हें किसी न किसी फेस्टिवल के कारण ही दुनिया में जाना गया, जैसे कान फिल्म फेस्टिवल। और हमारे इलाके की मिट्टी में तहज़ीब घुली हुई है, हमें उस तहज़ीब पर भरोसा है, उसे आगे लेकर जाना है।
इलाके में कल्चरल गतिविधियों में सक्रिय रहने वाले नोजगे स्कूल ने फेस्टिवल के वेन्यू पार्टनर बनने के लिए खुशी और गर्व से सहमति दी है, फेस्टिवल के होनरेरी एडवाइजरी बोर्ड के सदस्य और नोजगे के निदेशक पी. सूदन ने कहा कि शिक्षा के साथ कलाओं के लिए हम हमेशा तत्पर रहते हैं, और इस आयोजन के ज़रिए सिनेमा की कला से यह इलाका गहरे से जुड़ेगा, इलाके की सांस्कृतिक परंपरा में नया रंग शामिल होगा, वहीं युवा पीढ़ी को एक अलग रोज़गार फील्ड के लिए विकल्प मिलेगा।
विशेष फोकस
फेस्टिवल में पंजाबी सिनेमा और बच्चों के सिनेमा पर अलग सेक्शन होगा। यानी पंजाबी और बच्चों की फिल्में दिखाई जाएगी, उनसे जुड़े कलाकारों से मिलने का अवसर मिलेगा।
प्रवेश कैसे होगा?
फिल्मों की स्क्रीनिंग में एंट्री नि:शुल्क यानी 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर होगी परन्तु सुरक्षा और व्यवस्था कारणों से रजिस्ट्रेशन करवाना होगा जो ऑनलाइन और ऑन द स्पॉट दोनों रहेगा, रजिस्ट्रेशन भी निःशुल्क ही होगा। म्यूजिकल इवनिंग, ओपनिंग और क्लोजिंग सेरेमनी का प्रवेश विशेष पास से होगा।