गब्बर और ठाकुर की भूमिकाएं हुईं ऑफर
एएनआई से बात करते हुए धर्मेंद्र ने कहा 'बहुत कम लोग जानते हैं कि मुझे 'शोले' में गब्बर और ठाकुर की भूमिकाएं ऑफर की गई थीं, लेकिन मैं वीरू की भूमिका निभाना चाहता था क्योंकि वह मेरे जैसा ही था। मुझे शूटिंग में बहुत मजा आया। मेरे पसंदीदा दृश्य टंकी वाला दृश्य, मंदिर वाला दृश्य और बहुत से दूसरे दृश्य थे, लेकिन मुझे लगता है कि सबसे शक्तिशाली दृश्य जय की मृत्यु थी, जो आज भी मेरे दिमाग में बसा हुआ है।'
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कैरेक्टर में समा जाते हैं धर्मेंद्र
बातचीत में धर्मेंद्र ने बताया कि उन्होंने फिल्मों में जो रोल किए हैं वह किस तरह किए हैं। उन्होंने बताया 'मेरे लिए कुछ भी मुश्किल नहीं था। मैं कोई प्रैक्टिस नहीं करता। मैं धर्मेंद्र नहीं लगता वहां। मैं वीरू ही लगता हूं। मैं कैरेक्टर में चला जाता हूं।'
सिक्का है असली हीरो
फिल्म 'शोले' में दिखाया गया है कि जब भी जय और वीरू कोई फैसला लेना चाहते हैं, तो वह एक सिक्के से टॉस करते हैं। इस तरह से फैसला जय के हक में जाता है। फिल्म के आखिर में वीरू को पता चलता है कि जिस सिक्के का जय इस्तेमाल करता है, उसके दोनों तरफ एक ही निशान होता है। इस पर धर्मेंद्र कहते हैं 'फिल्म में हर किरदार हीरो है, लेकिन असली हीरो सिक्का है।'
फिल्म के बारे में
साल 1975 में रिलीज हुई फिल्म 'शोले' भारतीय सिनेमा की सबसे अच्छी फिल्मों में से एक है। फिल्म का निर्देशन रमेश सिप्पी ने किया था। इसमें अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, हेमा मालिनी, जया बहादुरी और अमजद खान ने अहम किरदार निभाया था।