करीबियों को अपने फार्महाउस के आम भेजते हैं
‘धर्मेंद्र को अपने आम के पेड़ों से बहुत लगाव है। जब पेड़ों पर आम लगते हैं, तो उन्हें देखकर उनके चेहरे पर बच्चों जैसी खुशी झलकती है। वो अपने करीबियों को आम भेजते हैं। मुझे भी उन्होंने अपने फार्महाउस के आम भेजे थे और बहुत प्यार से कहा था कि यह उनके दिल के बहुत करीब हैं। उन्हें देसी घी और घर का बना सादा खाना बहुत पसंद है। वो कहते हैं कि सादगी में ही असली सुंदरता है। उनका खाना और रहन-सहन दोनों बहुत सादे और सच्चे हैं।’
योगा करते और सिखाते भी हैं
'योगा डे के दिन मैंने उन्हें फार्महाउस पर योग करते देखा था। वो खुद योग करते हैं और दूसरों को भी सिखाते हैं। उन्होंने मुझे भी कुछ आसन सिखाए थे। फिटनेस के मामले में वो हमेशा बहुत अनुशासित रहते हैं। उनका मानना है कि शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखना ही असली सुख है।'
परिवार के साथ धर्मेंद्र
- फोटो : फेसबुक@Olden Indian Cinema
परिवार को देखकर खुश हो जाते हैं धर्मेंद्र
‘धर्मेंद्र जी का फार्महाउस बहुत सुंदर और शांत जगह है। वो अपनी पहली पत्नी प्रकाश जी के साथ वहीं रहते हैं। कभी-कभी उनके परिवार के बाकी सदस्य भी वहां आते हैं। जब परिवार आता है तो धर्मेंद्र के चेहरे पर एक अलग ही चमक आ जाती है। वो सबके साथ बैठते हैं, बातें करते हैं और खूब हंसते हैं। बच्चों से उनका लगाव बहुत गहरा है। वो उनसे बात करते हैं, उनकी शरारतों पर मुस्कुराते हैं और बहुत प्यार से पेश आते हैं।’
अक्सर अपने पुराने फोटो देखा करते हैं
‘अपनी पुरानी तस्वीरों को देखकर धर्मेंद्र को बहुत सुकून मिलता है। वो अक्सर अपने पुराने फोटो देखा करते हैं। उनके पास बहुत बड़ा फोटो कलेक्शन है। हर तस्वीर के साथ कोई न कोई याद जुड़ी होती है, जिसे वो बहुत प्यार से बताते हैं। जब वो अपनी पुरानी यादों के बारे में बात करते हैं, तो उनके चेहरे पर वही पुराना भाव, वही गर्मजोशी लौट आती है।’
यह खबर भी पढ़ेंः Dharmendra: परिवार के साथ ही रहना चाहते हैं धर्मेंद्र, घर पर बनाया गया ICU; चार नर्स और डॉक्टर करेंगे देखभाल
शायरी का है काफी शौक
‘उन्हें शेरो-शायरी का बहुत शौक है। वो खुद शायरी लिखते हैं और सुनाते हैं। उनकी शायरी में सादगी और सच्चे जज्बात होते हैं। उनकी आवाज में एक अपनापन है, जो सीधा दिल को छू जाता है। धर्मेन्द्र जी हमारे दिलों में बसते हैं। हम सब दुआ करते हैं कि वो जल्द से जल्द पूरी तरह ठीक हो जाएं और हमेशा यूं ही मुस्कुराते रहें।’