सीरीज 'रॉकेट बॉयज’ के क्रिएटर निखिल आडवाणी
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हमारे लिए बहुत कुछ कहना बाकी है: निखिल आडवाणी
वेब सीरीज 'रॉकेट बॉयज’ के क्रिएटर निखिल आडवाणी कहते हैं, ‘मंगलयान, चंद्रयान और उसके बाद जो कुछ हो रहा है, ये सब अपने आप में बहुत बड़ी कहानियां हैं। अब लोगों को इसके पीछे की इंसानी कहानी देखने की जरूरत है। इसके पीछे के लोगों के संघर्ष और उनकी असफलताएं भी उतनी ही दिलचस्प हैं। मैं खुद भी ऐसी और फिल्में बनाना चाहूंगा।’
भारतीय सिनेमा की स्पेस उड़ान धीमी क्यों है?
कुल मिलाकर शायद जवाब सिर्फ बजट, वीएफएक्स या दर्शक नहीं है। भारत के पास स्पेस की कहानियां और उपलब्धियां हैं, वहीं हमारा दर्शक भी दुनिया भर का सिनेमा देख रहा है। कमी शायद उस जोखिम को लेने की है, जो विज्ञान, मजबूत कहानी और दर्शक पर भरोसे के साथ जरूरी है।
‘मिशन मंगल’, ‘रॉकेट्री’, ‘रॉकेट बॉयज’ और ‘कार्गो’ ने अलग-अलग रास्ते दिखाए हैं। इनसे साफ है कि स्पेस सिनेमा के लिए हमेशा बड़ा बजट नहीं, बल्कि अच्छी रिसर्च, वैज्ञानिकों का साथ, मजबूत लेखन और दर्शकों पर भरोसा जरूरी है। भारत की अंतरिक्ष यात्रा जारी है। शायद अब भारतीय स्पेस सिनेमा की असली उड़ान की बारी है।